साहित्य

इंडो जैज़ में कलाकारों की नादात्मक आभा

 

विश्व का कोई भी संगीत भाषा का मोहताज नहीं है, जहां भाव पक्ष है वहां संगीत को शब्दों की सीमा मे नहीं बांधा जा सकता। विभिन्न देशों की सांस्कृतिक संगीतमय विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नादऑरा द्वारा आयोजित 9 जनवरी 2024 को इंडिया हैबिटाट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में अंतर्राष्ट्रीय इंडो जैज़ संगीत समारोह भव्य रूप में मनाया गया। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने इस समारोह में पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। इस समारोह में भारत के अतिरिक्त अमेरिका के आईवा, फिलाडेल्फिया और जापान से आए कलाकारों ने अपने नाद के माध्यम से अपनी आभा बिखेरी।

इंडो जैज़
दिल्ली की शीतलहरी सर्द मौसम में रसिक दर्शकगण इंडो जैज़ संगीत का आनन्द लेते हुए

उल्लेखनीय है कि ‘नादऑरा’ एक ऐसी सांस्कृतिक संस्था है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत, योग एवं अन्य पारंपरिक संगीत और प्रदर्शन कलाओं के शिक्षण और प्रचार में उत्कृष्टता के लिए समर्पित है। नादऑरा आधुनिक दृष्टिकोण और सामाजिक संवेदनशीलता से प्रेरित है और आज के समकालीन संदर्भ में भारत की विविध और प्राचीन विरासत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले 17 वर्षों से नादऑरा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समारोह विभिन्न उत्सवों पर आयोजित करती आ रही है। जिसमें बनारस घराने के महान तबला सम्राट पंडित अनोखे लाल मिश्र एवं पंडित छोटेलाल मिश्र की याद में राष्ट्रीय संगीत समारोह, चक्रदार महोत्सव करता आ रहा है। जिसमें देश एवं विदेश के विश्वप्रसिद्ध गायक एवं वादक कलाकारों ने भाग लिया है। संस्था ने उन्हें सम्मानित भी किया है और उदीयमान कलाकारों को मंच भी प्रदान किया है।

जैज़ संगीत के प्रसिद्ध कलाकार प्रो दमानी फिलिप्स सैक्सोफोन का वादन करते हुए और स्वतंत्र तबला वादन करते 6 वर्षीय मास्टर प्रिशु

दीप प्रज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का अगला आकर्षण 6 वर्षीय प्रतिभावान बाल कलाकार मास्टर प्रिशु के स्वतंत्र तबला वादन से हुआ। इन्होंने अपने नन्हे-नन्हे हाथों से तबला वादन का प्रारंभ विलम्बित लय में तीनताल के पारंपरिक उठान के आकर्षक वादन से किया। तत्पश्चात मध्य लय में पारंपरिक टुकड़ा, परन, फरमाईशी चक्रदार, नवहक्का इत्यादि का वादन कर दर्शकों से खूब तालियां बटोरी। इनके साथ सारंगी पर सईद्दुर रहमान ने साथ दिया। लय की बारीक सूझबूझ, कठिन बोलों की सहज निकास एवं वादन में पूर्ण आत्मविश्वास जैसे अपार संभावनाएं को देखते हुए अमेरिका से आए विश्व प्रसिद्ध जैज़ कलाकार डॉ दमानी फिलिप्स ने मास्टर प्रिशु को ‘बाल रत्न अवार्ड’ ताम्रपत्र के रूप में देकर बाल कलाकार का उत्साह वर्धन किया ताकि साधना के पथ पर यह सदैव अग्रसर रहे।

जैज़ संगीत के विद्वान प्रो दमानी फिलिप्स को नाद वाचस्पति अवार्ड से सम्मानित करते डॉ कुमार ऋषितोष एवं कला संयोजक आचार्य जागृति 

नादऑरा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ कुमार ऋषितोष ने जैज़ संगीत के क्षेत्र में विशेष योगदान को देखते हुए संस्था की तरफ से अमेरिका से आए जैज़ विशेषज्ञ डॉ. दमानी फिलिप्स को ‘नाद वाचस्पति अवार्ड’ एवं जापान से आईं बेसिस्ट शिफुमी साइतो को ‘नाद श्री’ अवार्ड से सम्मानित किया। तत्पश्चात फिलाडेल्फिया से आए फुलब्राइट रिसर्च फेलो एवं ड्रमर विंसेंट केली जो कई वर्षों से डॉ कुमार ऋषितोष से गुरु शिष्य परंपरा में तबला वादन की शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं और अमेरिका में भारतीय संगीत का प्रचार प्रसार कर रहे हैं, उन्हें भी ‘नाद श्री’ अवार्ड प्रदान किया गया। बांसुरी वादक सतीश पाठक एवं सारंगी वादक सईद उर रहमान को सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम निदेशक योग गुरु जागृति ने पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र एवं तामपत्र भेंटकर सभी कलाकारों को पुरस्कृत किया।

अगला मुख्य आकर्षण हिन्दुस्तानी संगीत एवं जैज़ संगीत का संगीतमय संवाद था। इंडो जैज़ के पूरे प्रस्तुति में जहां राग-जोग में शिव सूत्र एवं अति प्राचीन महामृत्युंजय मन्त्र जो विलम्बित लक्ष्मी ताल 18 मात्रा में निबद्ध थी एवं शिव तांडव स्तोत्र को जैज़ संगीत के साथ नया स्वरुप को देखकर दर्शक भाव विभोर हो रहे थे वहीं जैज़ संगीत के अति लोकप्रिय धुनों जिसमें ‘फूट प्रिंट’ एवं ‘सिंग ए सौंग ऑफ सौंग’ में मेलाडी और हार्मोनी के साथ उनमें निबद्ध छंदों में कलाकारों की अपनी सृजन क्षमता की अपार संभावनाएं भी देखने को मिली। दो संगीत की धाराओं में सांगीतिक अनुशासन के साथ जो स्वर और लय के माध्यम से संवाद देखा गया वह बहुत ही आकर्षक एवं मंत्रमुग्ध करने वाला था। जिसमें सरस्वती स्तुति का भी संवाद था। 

जैज़ संगीत के लोकप्रिय धुन ‘फूट प्रिंट’ में तबला वादन करते डॉ कुमार ऋषितोष

भाग लेने वाले कलाकार थे अमेरिका से आए विश्व प्रसिद्ध सैक्सोफोनिस्ट व जैज संगीत के प्रोफेसर दमानी फिलिप्स, तबले पर भारत के सुप्रसिद्ध तबला वादक, लेखक एवं आयोजक डॉ कुमार ऋषितोष, फिलाडेल्फिया के सुप्रसिद्ध ड्रमर, लेखक एवं शोधार्थी विंसेंट केली, जापान की सुप्रसिद्ध बेसिस्ट वादिका शिफुमी साइतो, बांसुरी पर सतीश पाठक एवं सारंगी पर सईद उर रहमान कार्यक्रम के मुख्य आकर्षक बिंदु रहे।

ड्रम पर फिलाडेल्फिया के विंसेंट केली एवं साथ में बास पर जापान की शिफुमी साइतो

इस समारोह में खासकर विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों के प्रदर्शन में पूरे उत्साह, उमंग और  संगीत के प्रति अपार समर्पण देखने को मिला। मंच संचालन में सानंवी वशिष्ठ की भी बखूबी भूमिका रही। दिल्ली की इस कड़कड़ाती शीतलहरी सर्द मौसम में भी भरे पूरे दर्शकों के बीच संगीत के दो रूपी धाराएं इस प्रकार एकाकार हो गई की पूरा सभागार गायन वादन की इस चमत्कारिक आनन्द से आनंदित होता रहा। लोगों की स्मृति में यह प्रस्तुति दीर्घकाल तक बनी रहेगी इसमे कोई संदेह नहीं

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आचार्य जागृति

लेखिका कला समीक्षक, योग गुरु एवं कला संयोजक हैं। सम्पर्क- jagritisarita@gmail.com
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