दिल्ली

मेट्रो और बस में फ्री यात्रा मर्दवादियों को मिर्च लगी – स्वतंत्र मिश्र

 

  • स्वतंत्र मिश्र

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मेट्रो रेल और बस में महिलाओं को फ्री यात्रा की इजाज़त देने का यह कदम एक लोक कल्याणकारी राज्य की दृष्टि से बहुत अहम है। इसे इस तरह से देखना चाहिए कि अगर आपकी पत्नी, माँ, बेटी, बहन और भाभी नौकरी कर रही हैं और उनका  आने-जाने पर  3000 रुपये खर्च हो रहा है तो ये बचत एक  बड़ी बचत सिद्ध होगी। महंगाई के दौर में ये राहत भी बहुत है।

एक बात और कि कई महिलाएं घरों में इसलिए भी कैद रहती हैं क्योंकि उन्हें उनके पिता, भाई, पति और बेटे  खर्च नहीं देते हैं। कइयों को रेगुलर कॉलेज की जगह पत्राचार से पढ़ाई करनी पड़ती है, क्योंकि परिवार उनपर यह आनेजाने का खर्च नहीं करना चाहता या वहन करने में असमर्थ होते हैं। अब वे स्कूल और कॉलेज जा सकेंगी।

अगर इस कदम को सुरक्षा की दृष्टि से भी देखें तो अति महत्वपूर्ण है। रात को 8, 9, 10 बजे प्राइवेट सेक्टर में महिलाएं काम करके निकलती हैं तो एक स्टेशन (प्रारंभिक बिंदु) से दूसरे स्टेशन (अंतिम बिंदु) तक वो मेट्रो में सुरक्षित यात्रा कर सकती हैं।

दूसरा रात में अगर किसी कारण से आपका कोई पीछा कर रहा है तो बेझिझक महिलाएं मेट्रो में घुसकर सुरक्षित महसूस कर सकती है।

कुछ लोगों की इस तरह की पोस्ट भी देखी जिसमें उन्होंने दिल्ली सरकार के घाटे या कर्जे पर केजरीवाल को कोसा है। इस तरह तो देश में कोई भी सब्सिडी नहीं देनी चाहिए। तेल, गैस सिलिंडर , शिक्षा आदि पर भी सब्सिडी खत्म कर देनी चाहिए, क्योंकि इनका भी बोझ राजकोष और अन्ततः हमारे यानी टैक्स देने वालों के कंधों पर ही पड़ता है।

फेसबुक पर इसे महिलाओं को बेवजह की मदद करने का रोना रोते दिख रहे हैं। उन्हें देखकर समझ आता हैं कि ये लोग सम्भ्रांतपने और मर्दवाद के कॉकटेल के हैंगओवर से ग्रस्त हैं और आजन्म रहेंगे।

लाभान्वित होने वाली महिलाओं में आप किसे देखते हैं …सम्भ्रांत महिलाओं को या 5000 10000 कमाने वाली निम्नमध्यवर्गीय महिलाओं को।

लेखक टीवी पत्रकार हैं|

सम्पर्क-  +919521224141,

 

कमेंट बॉक्स में इस लेख पर आप राय अवश्य दें। आप हमारे महत्वपूर्ण पाठक हैं। आप की राय हमारे लिए मायने रखती है। आप शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा।

लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments


डोनेट करें

जब समाज चौतरफा संकट से घिरा है, अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं, मीडिया चैनलों की या तो बोलती बन्द है या वे सत्ता के स्वर से अपना सुर मिला रहे हैं। केन्द्रीय परिदृश्य से जनपक्षीय और ईमानदार पत्रकारिता लगभग अनुपस्थित है; ऐसे समय में ‘सबलोग’ देश के जागरूक पाठकों के लिए वैचारिक और बौद्धिक विकल्प के तौर पर मौजूद है।
sablog.in



विज्ञापन

sablog.in






0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x