संतोष बघेल

संतोष बघेल

लेखक शिक्षाविद् एवं स्‍वतन्त्र लेखक हैं| सम्पर्क- +919479273685, santosh.baghel@gmail.com
  • Aug- 2026 -
    31 August
    चर्चा में

    लोकतंत्र में दिमागी नक्सली

      15 अगस्त 2026 को लालकिले की प्राचीर से माननीय प्रधानमंत्री के उद्बोधन में दिमागी नक्सली शब्द के प्रयोग के पश्चात् इस शब्द को लेकर तीव्र विमर्श आरम्भ हो गया है। इस शब्द के निहितार्थ, प्रयोजन और सामाजिक प्रभाव को…

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  • 13 August
    देशआजादी की लड़ाई

    स्वतंत्र देश में परतंत्र नागरिक

      इस साल  देश में आज़ादी का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया जायेगा। भारत को स्वतंत्र कराने के लिए न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों के त्याग, तपस्या, संघर्ष और बलिदान…

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  • Jul- 2026 -
    31 July
    साहित्यप्रेमचंद 

    प्रेमचंद: विरोध के कथा सम्राट

      साहित्य केवल समाज का प्रतिबिंब मात्र नहीं, अपितु उसकी भविष्य-दृष्टि का भी संवाहक है। वह काल के प्रवाह में घटित घटनाक्रमों का दस्तावेज मात्र प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि समय की वस्तुस्थिति को पहचान कर समाज के अंतःकरण में सुप्त…

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  • 25 July
    चर्चा मेंयथार्थोन्मुख आदर्शवाद प्रेमचंद

    प्रेमचंद की कहानियों में प्रतिरोध का स्वर

      किसी भी आन्दोलन की शुरुआत आकस्मिक नहीं होती। उसके पीछे सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक स्तर पर लम्बे समय से पनप रहा असंतोष और अधिकारों के हनन की पीड़ा होती है। जब किसी बड़े जनसमुदाय को यह अनुभव होने लगता…

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  • Mar- 2026 -
    8 March
    समाज

    छब्‍बीस आदमी के बीच टानिया

      साहित्य में समाज की तमाम समस्याओं का चित्रण किया जाता रहा है। अलग-अलग रचनाकारों ने इसे अपने-अपने नजरिये से रेखांकित किया है जिनमें से एक कहानी है, मैक्सिम गोर्की की ‘26 आदमी और एक लड़की’। इस कहानी के माध्यम…

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  • Mar- 2025 -
    17 March
    व्यंग्यमंथरा और कैकेयी रूपी दीमक

    मंथरा और कैकेयी रूपी दीमक

      साहित्य और समाज के अन्तर्सम्बन्ध को सदैव स्वीकारा गया है। समाज में घटित घटनाओं को साहित्य में जितने खुबसूरत तरीके से पिरोया गया, वह समाज के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका का निर्वहन करता रहा है। यही वजह है…

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  • Jun- 2024 -
    17 June
    शख्सियत

    लेखक की दुनिया

      सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के जाने-माने साहित्यकार-पत्रकार सतीश जायसवाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से उनसे मिलना-जुलना लगातार बना हुआ है। लेकिन पहली बार उनके घर जाने का अवसर 17 दिसंबर 2023 को मिला।…

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  • Aug- 2023 -
    22 August
    शख्सियत

    अपनी-अपनी बीमारी और हम

    “प्रजातंत्र का सबसे बड़ा दोष तो यह है कि उसमें योग्‍यता को मान्‍यता नहीं मिलती, लोकप्रियता को मिलती है। हाथ गिने जाते हैं, सर नहीं तौले जाते हैं।” प्रजातंत्र पर किया जाने वाला हरिशंकर परसाई का यह व्‍यंग्‍य आज भी…

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  • Jul- 2023 -
    31 July
    साहित्यप्रेमचंद 

    प्रेमचंद और किसानों की व्‍यथा कथा

      किसानों की व्‍यथा सदियों पुरानी है। यह बात जगजाहिर है कि दुनिया के लिए अन्‍नदाता कहे जाने वाले  खुद ही अन्‍न को तरसता रहा है। गुलाम भारत हो या आजाद किसानों की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। नील…

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  • Mar- 2023 -
    8 March
    समीक्षा

    प्रेम और वासना के बीच चित्रलेखा

      प्रारंभिक दौर से ही साहित्य को समाज के दर्पण के रूप में रेखांकित किया जाता रहा है। यह समाज में ज्ञानवर्द्धन और मनोरंजन का तो जरिया रहा ही है, साथ ही उन अनछुये पहलुओं को भी सामने लाने का…

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