संतोष बघेल

संतोष बघेल

लेखक शिक्षाविद् एवं स्‍वतन्त्र लेखक हैं| सम्पर्क- +919479273685, santosh.baghel@gmail.com
  • Jul- 2026 -
    25 July
    चर्चा मेंयथार्थोन्मुख आदर्शवाद प्रेमचंद

    प्रेमचंद की कहानियों में प्रतिरोध का स्वर

      किसी भी आन्दोलन की शुरुआत आकस्मिक नहीं होती। उसके पीछे सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक स्तर पर लम्बे समय से पनप रहा असंतोष और अधिकारों के हनन की पीड़ा होती है। जब किसी बड़े जनसमुदाय को यह अनुभव होने लगता…

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  • Mar- 2026 -
    8 March
    समाज

    छब्‍बीस आदमी के बीच टानिया

      साहित्य में समाज की तमाम समस्याओं का चित्रण किया जाता रहा है। अलग-अलग रचनाकारों ने इसे अपने-अपने नजरिये से रेखांकित किया है जिनमें से एक कहानी है, मैक्सिम गोर्की की ‘26 आदमी और एक लड़की’। इस कहानी के माध्यम…

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  • Mar- 2025 -
    17 March
    व्यंग्यमंथरा और कैकेयी रूपी दीमक

    मंथरा और कैकेयी रूपी दीमक

      साहित्य और समाज के अन्तर्सम्बन्ध को सदैव स्वीकारा गया है। समाज में घटित घटनाओं को साहित्य में जितने खुबसूरत तरीके से पिरोया गया, वह समाज के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका का निर्वहन करता रहा है। यही वजह है…

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  • Jun- 2024 -
    17 June
    शख्सियत

    लेखक की दुनिया

      सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के जाने-माने साहित्यकार-पत्रकार सतीश जायसवाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से उनसे मिलना-जुलना लगातार बना हुआ है। लेकिन पहली बार उनके घर जाने का अवसर 17 दिसंबर 2023 को मिला।…

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  • Aug- 2023 -
    22 August
    शख्सियत

    अपनी-अपनी बीमारी और हम

    “प्रजातंत्र का सबसे बड़ा दोष तो यह है कि उसमें योग्‍यता को मान्‍यता नहीं मिलती, लोकप्रियता को मिलती है। हाथ गिने जाते हैं, सर नहीं तौले जाते हैं।” प्रजातंत्र पर किया जाने वाला हरिशंकर परसाई का यह व्‍यंग्‍य आज भी…

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  • Jul- 2023 -
    31 July
    साहित्यप्रेमचंद 

    प्रेमचंद और किसानों की व्‍यथा कथा

      किसानों की व्‍यथा सदियों पुरानी है। यह बात जगजाहिर है कि दुनिया के लिए अन्‍नदाता कहे जाने वाले  खुद ही अन्‍न को तरसता रहा है। गुलाम भारत हो या आजाद किसानों की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। नील…

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  • Mar- 2023 -
    8 March
    समीक्षा

    प्रेम और वासना के बीच चित्रलेखा

      प्रारंभिक दौर से ही साहित्य को समाज के दर्पण के रूप में रेखांकित किया जाता रहा है। यह समाज में ज्ञानवर्द्धन और मनोरंजन का तो जरिया रहा ही है, साथ ही उन अनछुये पहलुओं को भी सामने लाने का…

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  • May- 2021 -
    18 May
    साहित्य

    कोरोना काल और प्रेमचंद की ‘शांति’ कहानी की प्रासंगिकता

      दुनिया में कई महामारियाँ समय-समय पर दस्‍तक देती रही है। किन्तु अब तक की सभी महामारियाँ किस्‍से-कहानियों तक ही सीमित थी। किन्तु पहली बार इन कहानियों अथवा महामारियों को प्रत्‍यक्ष तौर पर महसूस करने का मौका मिला है। महामारी…

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  • Sep- 2020 -
    14 September
    दिवस

    त्रिभाषा सूत्र और हिन्‍दी 

      भारतीय सभ्‍यता के विकास के साथ-साथ भाषा भी विकसित और परिमार्जित होती चली आ रही है। मानव जीवन का एक मूल्‍यवान धरोहर हमारी भाषा ही है। भाषा की समझ के साथ ही मानव जीवन का विकास सम्‍भव हो पाया…

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  • Jul- 2020 -
    31 July
    शख्सियत

    उपन्‍यास विधा और प्रेमचन्द

      हिन्‍दी साहित्‍य की जब भी बात होती है, तब सबसे पहले हमारे जहन में जिनकी छवि उभरती है, वे है प्रेमचन्द। हिन्दी साहित्‍य के विद्यार्थियों के अलावा अन्‍य साहित्‍य प्रेमी भी प्रेमचन्द को ही सबसे लोकप्रिय साहित्‍यकार मानते हैं।…

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