अमिता

अमिता

लेखिका स्वतंत्र लेखक एवं शिक्षाविद हैं। सम्पर्क +919406009605, amitamasscom@gmail.com
  • Jul- 2026 -
    28 July
    चर्चा में

    लोकतंत्र की वापसी का उद्घोष

      भारतीय लोकतंत्र का इतिहास केवल चुनावों का इतिहास नहीं है; यह जनआंदोलनों का भी इतिहास है। जब-जब सत्ता और समाज के बीच संवाद कमजोर हुआ, तब-तब जनता ने सड़क पर उतरकर लोकतंत्र का स्मरण कराया। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर…

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  • Mar- 2026 -
    8 March
    अंतरराष्ट्रीय

    यथार्थ और भ्रम के बीच महिला दिवस

      18 फ़रवरी 2026 को दैनिक भास्कर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जुड़ी एक अजीब सी खबर पढ़ने को मिली जो कुछ समय बाद ही पूरे देश भर में वायरल हो गया। यह खबर बलात्कार से जुड़े एक फैसले का था…

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  • Feb- 2026 -
    14 February
    दिवस

    प्रेम का शून्यकाल

      बसंत ऋतु के आते ही प्रकृति हर किसी के दिल को प्रेममय कर देती है। एक खुशनुमा एहसास दिलों पर राज करने लगता है। प्रेम पर न जाने कितने आख्यान और मिथक देश-दुनिया के इतिहास में निहित है। इसे…

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  • Sep- 2025 -
    5 September
    शिक्षा

    शिक्षा और शिक्षक के गिरते साख के बीच शिक्षक दिवस

      डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि “शिक्षा शेरनी का दूध है जो इसे जितना ज्यादा पीएगा, वह उतना ज्यादा दहाड़ेगा।” लेकिन आज के समय, काल, परिस्थिति के मद्देनजर यह सबकुछ उल्टा प्रतीत हो रहा है, जो जितना शिक्षित…

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  • Mar- 2025 -
    8 March
    स्त्रीकाल

    हे स्त्री तुम सिर्फ देह नहीं हो

    10 फरवरी 2025 को पूरे देश में उस समय खलबली मच गयी, जब छत्तीसगढ़ के एक न्यायधीश ने फ़ैसला सुनाते हुए यह कहा कि पति का पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन सम्बन्ध बनाना सज़ा के दायरे में नहीं आता…

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  • Feb- 2025 -
    14 February
    चर्चा में

    प्रेम का जहर

      साल 2025 का आगाज दो बेहद ही ऐतिहासिक फैसले के साथ प्रारम्भ हुआ, जिसमें एक फैसला कोलकात्ता का था और दूसरा केरल से सम्बन्धित। जब कोलकात्ता के ‘आरजी कर’ अस्पताल में पूरे देश को झकझोर देने वाली बलात्कार और…

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  • Oct- 2024 -
    7 October
    शख्सियतपुष्पेंद्र पाल सिंह

    पुष्पेंद्र पाल सिंह: एक अपराजित योद्धा

      “हो न सका किसी को उसके कद का अंदाजा। वह आसमान था लेकिन सर झुकाए फिरता था।” प्रो. पुष्‍पेंद्र पाल सिंह जो शिक्षा जगत में पीपी सर के नाम से प्रसिद्ध, एक बेमिसाल शख्‍सियत थे। वे जहां भी रहें,…

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  • Oct- 2023 -
    1 October
    मुद्दा

    वरिष्ठजनों की व्यवस्था को विनम्र श्रद्वांजलि

      श्रवण कुमार की कहानी पौराणिक मिथकों में एक आदर्श मिथक के रूप में विद्यमान रही है। हर मां-बाप की यही कामना होती है कि बेटा हो तो श्रवण कुमार की तरह। लेकिन श्रवण कुमार तो दूर आज कल के…

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  • Sep- 2023 -
    14 September
    भाषाहिन्दी हैं हम वतन नहीं

    हिन्दी हैं हम, वतन नहीं

      कुछ समय पहले देश के टॉप विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल एक विश्वविद्यालय में मैंने सह-आचार्य पद के लिए आवेदन किया था। जब साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हुई और साक्षात्कार के लिए योग्य अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई, तब…

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  • 5 September
    शिक्षा

    असाधारण से साधारण होते शिक्षक

    शिक्षा और शिक्षक दोनों ही समाज की एक मजबूत धुरी रहे हैं। इसीलिए कहा जाता है कि जिनमें शिक्षा नहीं होती है, वे लोग पशुवत कहे जाते हैं। पशु से अलग मनुष्य को, मनुष्य का दर्जा दिलाने में शिक्षक की…

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