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यूपी में कांग्रेस को आक्सीजन देने में जुटीं प्रियंका गाँधी वाड्रा

 

सत्रहवीं लोकसभा चुनाव में मोदी विजय रथ को रोकने के लिए रालोद, बसपा और सपा ने मिलकर महागठबंधन बनाया तो देश की सबसे पुरानी और प्रदेश में कमजोर पार्टी की पहचान रखने वाली कांग्रेस ने इस बार यूपी के भीतर चुनाव मैदान में अकेले ही ताल ठोंक रखा है। लगातार जनाधार खोने वाली कांग्रेस का यूपी में सारा दारोमदार प्रियंका गाँधी वाड्रा के करिश्मे पर टिका है। चुनाव का रिजल्ट चाहे जो हो, पर इतना जरूर है कि प्रियंका ने यूपी में आते ही निराश हो चुके कार्यकर्ता-समर्थकों में ‘हलचल’ पैदा कर दी है। प्रियंका के सधे अंदाज और सधी रणनीति ने सियासी गलियारों में कांग्रेस की चर्चा तेज कर दी। इससे कार्यकर्ता-समर्थकों में उत्साह बढ़ा है।

प्रियंका गांधी वाड्रा का कई बार सुरक्षा घेरा तोड़ सीधे जनता के बीच घुल मिलकर बतियाना, पास खड़े बच्चे को गोदी में उठा लेना, ये सब अपनत्व को बढ़ा रहे हैं तो मंदिर-मस्जिद पहुंचकर भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश भी लोगों को लुभा रही है। प्रियंका की रणनीति का ही हिस्सा रहा कि यूपी की प्रमुख संसदीय क्षेत्र वाराणसी, अयोध्या, प्रयाग, रायबरेली, अमेठी में पहुंचकर माहौल को गरमाया। इसी बहाने यूपी में सुस्त पड़ी कांग्रेस को गतिमान करने का कार्य किया।

राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा यूपी के जिस पूर्वांचल हिस्से की प्रभारी हैं, वहां 41संसदीय सीट है। प्रत्याशियों के चयन से लेकर उन्हें जिताने की जिम्मेदारी प्रियंका को बखूबी संभालना है। इसकी जोरदार तरीके से तैयारियाँ की जा रही हैं। प्रियंका के साथ बतौर सहयोगी तीन राष्ट्रीय सचिव सहप्रभारी के तौर पर लगाए गए हैं। प्रियंका की देखरेख में कैम्पेन कमेटी,  मेनीफेस्टो कमेटी, को-आर्डिनेशन कमेटी,  इलेक्शन स्ट्रेटजी एंड प्लानिंग कमेटी के साथ ही मीडिया एंड पब्लिसिटी जैसी कमेटियाँ सक्रिय कर दी गयी हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष पाण्डेय बताते हैं कि संगठन विस्तार के अलावा कमेटियों को नए जोश-खरोश के साथ उतारा गया है। छह साल से भंग किसान कांग्रेस को फिर से सक्रिय कर दिया गया है। इसके अलावा युवक कांग्रेस व भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के पैटर्न पर सेवादल और महिला कांग्रेस को सक्रिय करके चार जोन में बांटा गया है। सेवादल में पहली बार महिला और यंग विंग का गठन किया गया है। मीडिया प्रबंधन का जिम्मा पूर्व मन्त्री राजीव शुक्ला संभालेंगे। बेहतर मीडिया प्रबंधन के लिए चार विंग अलग से तैयार किए जा चुके हैं। चुनाव प्रबंधन में माइक्रो मैनेजमेंट फार्मूला लागू करते हुए हर बूथ पर दस यूथ की योजना है। हर बूथ कमेटियों में तीन महिला कार्यकर्ताओं की तैनाती सुनिश्चित की गयी है,  इसमें जाति-उपजाति का समीकरण भी साधने की कोशिश की गयी है।

संसदीय चुनाव का परिणाम आने में अभी लंबा वक्त है। परिणाम चाहे जिसके पक्ष में हो, यूपी की ज्यादा सीट कांग्रेस भले ही न जीत पाए पर एक बात तो तय है कि सुस्त पड़ी कांग्रेस में निराश हो चुके कांग्रेसी कार्यकर्ता-समर्थकों का भरोसा प्रियंका के बहाने पार्टी जरूर जीत रही है। देश के सबसे पुराने और प्रभावी रहे कांग्रेस के भविष्य के लिए इसे शुभ संकेत तो कहा ही जा सकता है।

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लेखक सबलोग के उत्तरप्रदेश ब्यूरोचीफ और भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रदेश महासचिव हैं| +918840338705, shivas_pandey@rediffmail.com

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