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टैक्स पेयर के 8 हजार करोड़ रूपये सरकारी विज्ञापनों पर खर्च

 

मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के बाद मार्च 2020 तक योजनाओं के प्रचार-प्रसार में 6 हजार 704 करोड़ 97 लाख रुपये खर्च किये, इसमें मीडिया (प्रिंट  इलेक्ट्रॉनिक), इंटरनेट और अन्य माध्यम शामिल थे, सिर्फ केन्द्र सरकार ही नहीं बल्कि कई राज्य सरकारों ने भी विज्ञापन पे औसतन ₹5000 करोड़ रुपये खर्च किये, इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और दिल्ली सरकारों के द्वारा किये गये खर्च का ब्यौरा है।

इतने सारे रुपये खर्च करने के बावजूद भी 70% योजनाएं का सिर्फ 40% पैसा ही खर्च हो पाया है, प्रचार प्रसार में खर्च किये गये पैसों का ब्योरा 3 स्रोतों से ली गयी है जिसमें आरटीआई एक्टिविस्ट रामवीर तनवीर, मनीष कुमार (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र) और सूचना प्रसारण मंत्रालय के द्वारा दी गयी है। इनमें चुनाव प्रचार में खर्च हुए पैसों का जिक्र नहीं है।

मोदी सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च  

मई 2014 से मार्च 2020 तक सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 2829 करोड़ रुपये खर्च हुए, वही प्रिंट मीडिया के माध्यम से 2770 करोड़ रुपये खर्च हुए, इंटरनेट के माध्यम से ₹101 करोड़ खर्च हुए और बैनर, पोस्टर पे 997 करोड़ रुपये खर्च हुए, अगर इतने पैसे योजनाओं को अच्छे से लागू करने में लगा दिया जाता तो आज ऑक्सीजन सिलेंडर, आईसीयू बेड, अस्पताल की कमी नहीं पड़ती।

मोदी सरकार ने ₹3 करोड़ 6 लाख/दिन सिर्फ योजनाओं के विज्ञापन में खर्च किये वहीं एक वेंटिलेटर की कीमत करीब ₹3 लाख है, एक ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कीमत 1.25 करोड़ रुपये, एक वैक्सीन की कीमत 150 रुपये है। सरकार ने जितने पैसे हर रोज विज्ञापन पर खर्च किये उतने पैसे में 100 वेंटिलेटर/दिन खरीदे जा सकते थे, 3 ऑक्सीजन सिलेंडर/ दिन लगाए जा सकते थे, 125 वैक्सीन/ दिन खरीदे जा सकते थे।

अरविंद केजरीवाल के पहले कार्यकाल (2015-16) से दूसरे कार्यकाल (2020–21) तक 804 करोड़ 93 लाख रुपये खर्च हुए, केजरीवाल ने हर रोज ₹36 लाख 75 हजार खर्च किये, वहीं प्रधानमंत्री ने हर रोज ₹3 करोड़ 6 लाख खर्च किये।

दिल्ली सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले 6 सालों में ₹87 लाख/दिन सिर्फ विज्ञापनों पर खर्च किये, बिहार में प्रति व्यक्ति आय ₹43 हजार है जो देश में सबसे कम है, वहीं देश की राष्ट्रीय औसतन प्रति व्यक्ति आय ₹1लाख 35 हजार है।

बिहार सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च  

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने 2016-17 में नमामि देवी नर्मदा प्रोजेक्ट में पत्रकारों के कवरेज हेतु परिवहन खर्च ₹13 लाख 30 हजार खर्च किये।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2018 से 2020 तक करीब ₹204 करोड़ खर्च किये, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ₹92 करोड़ 72 लाख वहीं प्रिंट मीडिया पर ₹110 करोड़ 45 लाख खर्च किये गये।

उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा विज्ञापन पर खर्च की गयी डाटा उपलब्ध नहीं हो पाई लेकिन पिछले चार महीनों में योगी सरकार की योजनाओं का विज्ञापन 58,000 मिनट चले, दिन के हिसाब से देखें तो 40 दिन सिर्फ न्यूज़ चैनलों पर विज्ञापन ही चले, पिछले 4 महीनों से 8 घंटे/दिन विज्ञापन चल रहे हैं। समानता न्यूज़ चैनलों पर 10 सेकंड का विज्ञापनों का खर्च ₹6000 पड़ता है इसके आधार पर आप खर्च का अनुमान लगा सकते हैं। प्रधानमंत्री की औसतन विज्ञापनों पर ₹1117 करोड़/ साल खर्च किये, वहीं 28 राज्यों का औसतन विज्ञापन खर्च 4500 – 5000 करोड़/ साल है।

भारत के 28 राज्य ₹13.50 करोड़/ दिन खर्च करती है तो केन्द्र सरकार ₹13.50 करोड़/ दिन खर्च करती है। अगर मोदी सरकार की तुलना मनमोहन सरकार से की जाए तो मनमोहन सरकार ने 10 सालों में ₹2658 करोड़/ दिन खर्च किये वहीं नरेंद्र मोदी सरकार ने 6 सालों में ₹3 करोड़ 6 लाख खर्च/ दिन किये जो कि पिछले मनमोहन सरकार से 6 गुना ज्यादा है।

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मनीष कुमार

लेखक लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र हैं। सम्पर्क +917325004263, manishkumarpandey258@gmail.com
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