पुस्तक-समीक्षा

फिल्मी संवादों सी ‘जिंदगी यू टर्न’ सी

 

हिंदी में लिखने का ट्रेंड धीरे-धीरे बदलने लगा है। किस्से, कहानियां, उपन्यास आज भी लिखे जाते हैं लेकिन फेसबुकिया साहित्य जैसे शब्द भी अब कानों में पड़ने लगे हैं। इस साहित्य में चैटिंग के आधार पर इधर कुछ चर्चित उपन्यास भी आए। जिन्हें चैट शैली में लिखकर साहित्यकारों ने चैट उपन्यास का नाम दिया।

इससे पहले थोड़ा जाएं तो नब्बे के दशक में जब भी आप ट्रेनों और बसों में सफर करते थे तो आपकी नज़रें स्टेशनों पर लुगदी साहित्य के विपणन पर अवश्य गयी होगी, जो किसी भी भाषा के लिए पाठक वर्ग तैयार करने का काम करती है। लुगदी साहित्य या लुगदी पत्रिकाएं वे किताबें जो बड़ी मात्रा में पढ़ी जाती रही लेकिन चोरी-चोरी।

किस्से कहानियां उपन्यास आदि सबसे ज्यादा कल्पनाओं के मिश्रण से ही उपजे हैं। उनकी घटनाएं और पात्र जितने काल्पनिक और रोमांचक हों लेकिन लगे वे समाज के आपके अपने आस पास के तो पाठकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेते हैं। इनकी रोचकता की चरम सीमा ये है कि पाठक इसे बहुत ही कम समय में ही पूरा पढ़ सकता है।

उस दौर में कईयों को ‘पढ़ने का चस्का’ लगाने वाली ये किताबें, किसी भी भाषा के लिए पाठक वर्ग तैयार करने का काम करती हैं। वैसे रिसाइकल्ड पेपर यानि लुगदी कागज पर छपने की वजह से इसे ‘लुगदी साहित्य’ कहा जाता है।

सम्मानित हिंदी साहित्य के जलवेदार आलोचकों के ‘फरमे’ में फिट न आने के कारण इस पूरे साहित्य को ही ‘लुगदी’ या ‘लोकप्रिय साहित्य’ कहकर मुख्य साहित्य की धारा से भले खारिज कर दिया गया हो लेकिन सस्ते दाम, भरपूर मनोरंजन और सरल भाषा के चलते ये किताबें आम पाठकों के बीच हमेशा पॉपुलर रही हैं।

अब यहां ऐसी ही कुछ किताब है, जो प्रिंट में आकर्षक है इसलिए उस नजरिए से आप लुगदी नहीं कह सकते इसे। लेकिन इसमें जो चैट शैली अपनाई है लेखक ‘तेजराज गहलोत’ ने, वह बराबर आपका मनोरंजन तो करती चलती है लेकिन इसी में वह कुछ गूढ़ बातें भी वे कह जाते हैं हैश टैग के साथ कि वे जीवन में व्यवहारिकता का ज्ञान भी लगने लगती हैं।

कहीं-कहीं फिल्मी संवादों सरीखी बन पड़ी तो कहीं जिंदगी में अहम मोड़ पर अपने में बदलाव लाने और सोशल मीडिया के हैश टैग जमाने के साथ पॉपुलर होने जैसे किस्से भी इसमें भरे हुए हैं।

यह अपने आप में एक मुक्कमल किताब है जिसमें हंसी के फव्वारे भी हैं। जीवन के संदेश भी, किस्से भी, सच भी, प्रेम भी, राजनीति भी, कोरोना भी और जिंदगी जब यू टर्न ले तो उस मौके पर संभलने वाले विचार भी।

ऐसी किताबें को प्रेमी जोड़ों, मनोरंजन करने वालों, कुछ नया पढ़ने वालों, सिनेमा लिखने वालों को पढ़ना चाहिए। इस किताब में कपिल शर्मा भी नजर आएगा फिल्म लेखन करने वालों को और गीतकार भी। बल्कि तेजराज की लेखन शैली दर्शाती है कि उन्हें फिल्मी संवादों को लिखने के लिए भी उनसे ट्रेनिंग ली जा सकती है।

हर एक हैश टैग के साथ तेजराज फिल्म के मुताबिक लगता है संवाद गढ़ रहे हों। शेरो शायरी पसंद करने वालों फिल्मी डायलॉग मारने वालों, अपने दोस्तों के बीच एक अलग तरह का ह्यूमर आप क्रिएट करना चाहते हैं तो चैट शैली में, हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण में जिन्दगी के इस यू टर्न का स्वाद आपको अवश्य चखना चाहिए। क्या पता फिर आपमें भी ऐसा कोई तेज सा राज छुपा हो जो कभी फनी तो कभी गंभीर नजर आए।

जीवन के महत्वपूर्ण पलों की सीख के साथ हंसते-हंसाते जब आप इस किताब के साथ मुसाफिर बनोगे तो यह आपको बहुत कुछ देकर, सौंपकर ही जाएगी। तो चलिए बदलाव लाते हैं ‘जिन्दगी यू टर्न’ से अपने जीवन में, रिश्तों में, देश में, व्यवहार में, समाज में, साहित्य में, प्रेम में।

इंक पब्लिकेशन प्रयागराज से प्रकाशित हुई इस किताब को अमेज़न पर यहाँ क्लिक कर ऑर्डर किया जा सकता है

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तेजस पूनियां

लेखक स्वतन्त्र आलोचक एवं फिल्म समीक्षक हैं। सम्पर्क +919166373652 tejaspoonia@gmail.com
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