पेगासस
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खतरे की घण्टी है पेगासस

 

द्वितीय विश्व युद्ध में जब जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गये तो उसकी विभीषिका से आहत होकर विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन और अन्य वैज्ञानिकों ने गहरी चिन्ता जतायी थी और उन्होंने मनुष्यों के नरसंहार पर अफसोस जताया था जबकि आइंस्टीन ने शुरू में अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट को पत्र लिखकर परमाणु बम बनाने की गति तेज करने की सलाह दी क्योंकि उन्हें आशंका थी कि जर्मनी कहीं पहले परमाणु बम न बना ले लेकिन उस जमाने के वैज्ञानिकों में भी थोड़ी बहुत मनुष्यता और संवेदनशीलता बची थी।

वे मनुष्य को हर हाल में बचाए रखने और उसके अस्तित्व, गरिमा और जीजिविषा की रक्षा किए जाने के पक्षधर थे लेकिन क्या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले आज के लोग इस बात को समझते हैं? क्या उनकी संवेदनशीलता बची है या सत्ता के लिए वे अन्धे हो गये हैं?

उनके लिए लोकतन्त्र की मर्यादा नैतिकता और मनुष्य की गरिमा का कोई अर्थ बचा है? बीसवीं सदी में वे दोनों विश्वयुद्ध हथियारों से लड़े गये पर अब तो यह लगता है कि कहीं तीसरा विश्वयुद्ध “साइबर युद्ध” के रूप में न लड़ा जाए। इस नयी टेक्नोलॉजी का जिस तरह दुरुपयोग हो रहा है, उससे यह चिन्ता सताने लगी है। साइबर युग में “युद्ध” आमने सामने नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से लड़ा जाता है और दुश्मन का पता भी नहीं चलता है लेकिन इस प्रकरण में सबसे चिन्ता की बात यह है कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल राजसत्ता अपनी ही जनता के खिलाफ कर रही है।

अगर एक देश की सरकार दूसरे देश की सरकार के फोन हैक करे तो बात समझ में आती है लेकिन अपने ही देश के शासक अपनी ही जनता के फोन को हैक करने लगे तो चिन्ता होना जायज है। वैसे, फोन हैक करने की देश मे यह कोई पहली घटना नहीं है। अपने देश में राजनेताओं के टेलीफोन टैप होते रहे हैं और पत्रकारों के भी टेलीफोन पर निगरानी रखी जाती रही है। लेकिन ताजा पेगासस कांड इस रूप में उल्लेखनीय है कि इस बार न केवल विधायिका कार्यपालिका बल्कि न्यायपालिका और संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के भी फोन को टाइप करने की कोशिशें की गयी।

पिछले दिनों विश्व के 17 मीडिया संस्थानों और एमनेस्टी इंटरनेशनल कम्पनी द्वारा जिस तरह दुनियाभर के करीब 50 देशों में पेगासस द्वारा फोन की जासूसी करने की घटना सामने आयी है, उस पर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिन्ता व्यक्त की है और विश्व भर में हड़कम्प मच गया है। लोगों में यह चिन्ता सताने लगी है कि पेगासस नाम का यह डिजिटल जासूस किसी की निजता का हनन कर उसे ब्लैकमेल भी कर सकता है और उसे नियन्त्रित भी कर सकता है।

भारत के 40 पत्रकारों विपक्ष के नेता राहुल गाँधी, प्रशांत किशोर, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी तथा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और चुनाव आयोग के तत्कालीन आयुक्त अशोक लवासा के टेलीफोन को निगरानी पर रखे जाने की जो खबर सामने आयी है, उससे मोदी सरकार की कारस्तानियों का पता चलता है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि सत्ताधरी पार्टी की महत्त्वपूर्ण नेत्री स्मृति ईरानी को भी नहीं बख्शा गया है। मोदी सरकार ने इसके पीछे अपना हाथ होने की खबर का खण्डन किया है लेकिन अगर सरकार ने पेगासस के माध्यम से जासूसी नहीं करवायी है तो यह सरकार का दायित्व बनता है कि वह इस घटना की जाँच कराए क्योंकि यह घटना देश की सुरक्षा एवं सम्प्रभुता से भी जुड़ी है।

यह राष्ट्रवादी सरकार केवल खण्डन कर कर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है और अगर वह ऐसा करती है तो इसका साफ मतलब है कि दाल में कुछ काला है। जनता इसका यही अर्थ निकलेगी कि सरकार नहीं चाहती कि इसके पीछे का सच सामने आए। इजरायल की कम्पनी एन एस ओ ने साफ कह दिया है कि वह अपना सॉफ्टवेयर केवल वैध सरकारों को ही बेचती है। अगर इजरायली कम्पनी का बयान सही है तो स्पष्ट है कि भारत सरकार ने वह सॉफ्टवेयर खरीदा है और अगर इजरायली कम्पनी का बयान गलत है तो भारत सरकार को वहाँ की सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन अभी तक सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्री ने इस बात का खण्डन नहीं किया है कि भारत सरकार ने इजरायल से वह सॉफ्टवेयर खरीदा नहीं है।

विपक्ष ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और गृह मन्त्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। उच्चतम न्यायालय को भी इस घटना पर संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि इस पूरे मामले में उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का भी नाम सामने आया है जिनकी टेलीफोन की निगरानी की जा रही थी। इसलिए रंजन गोगोई को भी सरकार से बात पूछनी चाहिए कि आखिर उनके टेलीफोन की निगरानी क्यों की गयी लेकिन ज़ाहिर है कि वह यह सवाल सरकार से नहीं पूछेंगे क्योंकि इससे उनके राज खुल जाएँगे। इसी सरकार ने उन्हें राज सभा का मनोनीत सदस्य बनाया है और एक महिला के यौन शोषण के मामले में उन्हें बरी किया गया है इसलिए वे चुप ही रहेंगे।

चुनाव आयोग के पूर्व सदस्य अशोक लवासा ने भी खुलकर सामने आने से मना कर दिया है। शायद इसके पीछे कारण यह रहा हो कि मोदी सरकार ने जिस तरह आयकर विभाग के माध्यम से उनकी पत्नी और बेटे को परेशान किया तथा 15 पीएसयू कम्पनियों को लाभ पहुँचाने का सन्देह उन पर व्यक्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की उससे लवासा भी सी बी आई के विशेष जज जस्टिस लोया के हश्र से भयभीत हो गए हों क्योंकि गुजरात के शोरबुद्दीन एनकाउंटर मामले की जाँच के दौरान उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गयी थी। उनके परिवार के लोगों को शक था कि जस्टिस लोया की हत्या कराई गयी है, लेकिन प्रश्न सिर्फ इतना नहीं है कि इस घटना की जाँच कराई जाए।

प्रश्न यह है कि इस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने के पीछे कोई नियम कानून या आचार संहिता होनी चाहिए या नहीं। वैसे भारतीय आई टी कानून साफ कहता है कि किसी का फोन हैक नहीं किया जा सकता। पेगासस भी केवल आतंकियों और अपराधियों के फोन ही हैक करती है। कोई सरकार किसी के खिलाफ इस तरह की जासूसी नहीं करा सकती है अगर उसे जासूसी करानी थी तो टेलीग्राफ एक्ट और भारतीय आईटी एक्ट के माध्यम से वह जासूसी कराती, लेकिन उसने एक विदेशी एजेंसी के माध्यम से यह जाँच कराई जो देशद्रोही कार्यवाही है।

खुद को देशभक्त बताने वाली इस सरकार ने अपने ही देश के लोगों के खिलाफ ऐसा कर आखिर क्या राज जाना चाहा था? इन घटनाओं से इस बात का सन्देह मजबूत होता है कि विदेशी सॉफ्ट वेयर के जरिये कहीं ईवीएम को तोहैक नहीं कराया जा सकता पर इस टेक्नोलोजी ने पूरीदुनिया केसामने सवाल खड़ा करदिया है। जिस तरह परमाणु बम मिसाइल आदि से नुकसान आम मनुष्य को होता है यह टेक्नोलॉजी भी आम आदमी को खतरे में डाल सकती है। उसकी नींद उड़ा सकती है।

चाणक्य ने अपने दुश्मनों की जासूसी करने की जो नीति अपनायी थी उसे मोदी सरकार ने अपनी जनता पर लागू कर दिया है। यह तो अच्छा हुआ, 2024 के चुनाव के पहले उनका भंडाफोड़ होगया है। चौकीदार ही चोर कहा जा रहा था, अब चौकीदार जासूस भी है लेकिन दुनिया के अन्य देश भी अपनी जनता के साथ यही काम कर रहे हैं। हर देश कीसत्ता क्रूर, धूर्त और निरंकुश तथा बेशर्म होती जा रही है। लोकतन्त्र उसके लिए दिखावे के शब्द हैं। कोविड से पूरी दुनिया जूझ रही है लेकिन इस घटना ने सरकार की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं

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लेखक वरिष्ठ कवि और पत्रकार हैं। सम्पर्क +919968400416, vimalchorpuran@gmail.com

One response to “खतरे की घण्टी है पेगासस”

  1. Reshma tripathi says:

    यथार्थ

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