वायरल मैसेज
चर्चा में

महँगाई और वायरल मैसेज

 

सोशल मीडिया में एक मैसेज वायरल हो रहा है। हो सकता है कि आपके पास भी आया हो। पढ़ने के बाद एक बार को सच मानने का दिल करने लगता है। लेकिन ज्यादातर बार इस तरह के मैसेज हकीकत से कोसों दूर होते हैं। आजकल राजनीतिक दलों ने इस तरह के मैसेज वायरल करवाने के लिए अपने-अपने आईटी सेल बना लिये हैं। सांगठनिक हित साधने के लिए, पार्टी का एजेंडा सेट करने के लिए संगठन के बुद्धिजीवियों से जरा सी रिसर्च करवा कर एक मैसेज बनाया जाता है और उसे तमाम सोशल मीडिया माध्यमों में फ्लोट करवा दिया जाता है। ऐसे मैसेज पढ़ने के बाद तत्काल प्रभावित करते हैं और सामान्य पाठक वर्ग उसे फॉरवर्ड करने से खुद को रोक नहीं पाता। मोबाइल इस्तेमाल करने वाला हर शख्स मैसेज की पड़ताल करे, ये भी जरूरी नहीं है। ऐसे में कई बार दोस्तों में, परिवारों में दरार भी पड़ने लगती है।

आप जानते हैं कि पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आने के बाद से ही पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिसका असर अब हर जगह दिखाई दे रहा है। अब महंगी सब्जियों की तो आदत सी हो गई है। लेकिन 1 अप्रैल से स्कूल खुलने के बाद स्कूल बसों के किराए में बढ़ोतरी ने अभिभावकों के पसीने छुड़ा दिये हैं। जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। विपक्ष संसद में आवाज तो उठाता है लेकिन उसकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर रह जाती है। ज्यादा हुआ तो संसद ठप।

उसके बाद? उसके बाद क्या, वही नेता, वही ढंग। वही हंसी-ठहाके। वही दुआ-सलाम। बहरहाल, बात हो रही थी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक मैसेज की। जो बहुत तेजी से फैल रहा है। किसी तरह से महंगाई का जिक्र ना हो, लोगों का ध्यान भटकाया जा सके, इसीलिए सवाल पूछा जा कि कोरोना काल में देश की 100 करोड़ आबादी को कोविड के टीके लगाने में जितना पैसा खर्च हुआ, क्या उतना पैसा मनमोहन सिंह छोड़ कर गये थे? आप पहले वायरल मैसेज पढ़ लीजिए ताकि आगे की बात आसानी से समझ में आ सके। 

वायरल मैसेज-

इतना पैसा मनमोहन सिंह छोड़ के गए थे क्या ?

क्या आपको पता है कि इस 100 करोड़ वैक्सीन की कीमत कितनी होगी (एक आंकड़े के अनुसार) इन 100 करोड़ में 88% कोविशिल्ड और 12% को-वैक्सीन के टीके लगे हैं। अब तक लग चुके को-वैक्सिन की कीमत 6,85,40,00,00,000 ₹ (छह खरब, पच्चासी अरब, चालीस करोड़ रुपए) और कोविशील्ड की कीमत 1,69,20,00,00,000 ₹ (एक खरब, उनहत्तर अरब, बीस करोड़ रूपए) हुए। मतलब अब तक 8,54,60,00,00,000₹ (आठ खरब, चौवन अरब, साठ करोड़) इतने रुपये की वैक्सीन अब तक मुफ्त लगवा चुके। अभी और टीका लगाने का काम चल ही रहा है।

आप ही तय कीजिये जिंदगी की कीमत पेट्रोल डीजल से कम है या ज्यादा?

लोगों को पेट्रोल डीजल व गैस के दाम ही दिखाई दे रहे हैं।

विचार जरुर करना। (वायरल मैसेज)

तो ये है वो वायरल मैसेज, जो आम जनमानस को वैक्सीनेशन का खर्च अरबों-खरबों में बताकर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को जस्टिफाई करने के लिए तेजी से सर्कुलेट हो रहा है। बहुत ही तेजी से। अगर 8,54,60,00,00,000₹ (आठ खरब, चौवन अरब, साठ करोड़) को थोड़ा सा संक्षेप दें तो ये रकम 8,54,6 करोड़ भी कही जा सकती है। लेकिन मीडिया में बड़ी संख्या, बड़े आंकड़े अपनी सुविधा के हिसाब से दिखाने का चलन है। वो भी सुविधा के हिसाब से। एक पारिवारिक ग्रुप में ये मैसेज आने के बाद 53 और 71 साल के दो भाई आमने-सामने आ गये।

इन पंक्तियों के लेखक को जब इसकी जानकारी मिली तो वायरल मैसेज पढ़ने के बाद थोड़ा रिसर्च किया। टीकाकरण के बारे में नहीं, बल्कि पेट्रोल के बारे में। जो जानकारी सामने आई वो चौंकाने वाली थी।

जनवरी 2022 में देश में पेट्रोलियम खपत 4,706 हजार बैरल प्रतिदिन थी। एक बैरल यानी 158.987 लीटर। तो देश में पेट्रोलियम की औसत खपत 74 करोड़ 81 लाख 92 हजार लीटर प्रतिदिन बनती है। पेट्रोल-डीजल में हाल के दिनों में औसतन 80 पैसे रोजाना की बढ़ोतरी हुई है। इसीलिए इसे 80 पैसे के हिसाब से ही आगे बढ़ाते हैं।

जितनी देश में पेट्रोलियम की खपत है, उसके हिसाब से 59 करोड़ 85 लाख (साठ करोड़ लगभग) रुपए रोज़ की कमाई बढ़ी है। यानी एक दिन में अगर 80 पैसे का इजाफा होता है तो उस दिन खजाने में 60 करोड़ रुपए जुड़ जाते हैं। यानी सिर्फ 80 पैसे इजाफे के हिसाब से ही मासिक आय की गणना करें तो 1800 करोड़ रुपए की कमाई। सुधी पाठक जानते हैं कि 6 अप्रैल की दोपहर 1 बजे तक ये पंक्तियां लिखे जाने तक पिछले 14 दिनों में 13 बार कीमतें बढ़ी हैं और 8 रुपए 80 पैसे तक का इजाफा हो चुका है। अगर ये कीमतें यहीं ठहर जाती हैं और अगले एक महीने तक यही भाव चलता है तब ये आंकड़ा ग्यारह गुणा हो जाएगा। यानी 1800 करोड़ गुणा 11.14 दिन पहले के भाव और आज (6 अप्रैल) के भाव की तुलना करने पर 19,800 करोड़ का लाभ एक दिन में हो रहा है। यानी 19 खरब, 80 अरब रुपए रोजाना। (ये गणना जनवरी 2022 में पेट्रोलियम की खपत के हिसाब से हैं)

अब वापस आपको ले चलते हैं वैक्सीनेशन पर होने वाले खर्च की तरफ, जो कि 8,54,60,00,00,000₹ (आठ खरब, चौवन अरब, साठ करोड़ रुपया या 8,54,6 करोड़ रुपया था। पूरे साल चले वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर खर्च हुई राशि की दोगुनी से ज्यादा रकम एक दिन में ही जुड़ जा रही है लेकिन कथित तौर पर कुछ लोग हर चीज में व्यक्तिपूजा की तरफ बढ़ जाते हैं। जाने में या अनजाने में।

हम सब जानते हैं कि पैट्रोल की कीमतों में पचास प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा टैक्स है। जिसमें से कुछ हिस्सा राज्य सरकारों के खाते में जाता है और कुछ हिस्सा केंद्र सरकार के खाते में। कई बार इस पर भी विवाद होता है कि केंद्र और राज्य सरकारों में से कौन ज्यादा टैक्स ले रहा है। लेकिन 16 जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने लोकसभा को बताया था कि सबसे ज्यादा वैट वसूलने वाला राज्य मध्यप्रदेश है जो कि 31.55 रुपए प्रति लीटर वैट वसूल रहा है। जो कि केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी से कम ही है। जिस वक्त हरदीप पुरी ये बात लोकसभा में रख रहे थे, तब एक्साइज ड्यूटी 32.90 रुपए प्रति लीटर थी।

सुधी पाठक पेट्रोल डीजल, एलपीजी और सीएनजी से होने वाली कमाई को किसी भी सूरत में हलके में ना लें। ये उत्पाद किसी भी निजी कंपनी की तरह से व्यवहार करते हैं। मसलन मोबाइल फोन कंपनियां करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब से एक-एक रुपया ही निकालती हैं, लेकिन उनके पास करोड़ों का हिसाब हो जाता है। वैसे ही पेट्रोल-डीजल के साथ भी है। इतना ही नहीं, लॉकडाउन खुलने के बाद देश में आर्थिक गितिविधियां अभी और तेज होंगी, ऐसे में चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 5.5 प्रतिशत तक ईंधन खपत बढ़ने का अनुमान भी है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आने वाले पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की मानें तो 2022-23 में ईंधन खपत बढ़कर 21.45 करोड़ टन हो सकती है। मार्च, 2022 को खत्म हुए पिछले वित्त वर्ष में इसके 20.32 करोड़ टन रहने की संभावना जताई गई है। जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे ईंधन की खपत 21.41 करोड़ टन रही।

जब महंगाई बढ़ेगी, जेब पर बोझ बढ़ेगा तो कन्नी काटी जाएगी, मैसेज भी आएंगे। लेकिन सवाल तो उठेंगे ही। और आप भी किसी मैसेज को फॉरवर्ड करने से पहले एक बार उस पर विचार जरूर कीजिएगा। क्या पता आपके हथियार से कोई अपना शिकार करने की जुगत में लगा हो

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लेखक पत्रकार हैं। सम्पर्क +919811343224, rajan.journalist@gmail.com

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