चर्चा में

आम घटना नहीं सोनाली फौगाट की मौत!

 

मंगलवार सुबह सभी लोग अपनी नॉर्मल दिनचर्या में व्यस्त थे। इसी दौरान एक पुख्ता सूत्र से यकीन न होने वाली एक ऐसी सूचना मिली, जिसमें बताया गया कि सोनाली फौगाट नहीं रही। इधर-उधर पुष्टि के लिए फोन घुमाए तो जल्द ही इस बात की पुष्टि भी हो गई कि सोनाली फौगाट की गोवा में मौत हो गई। शुरुआती पलों में मौत की वजह हार्ट अटैक बताया गया।

जी हां, वही सोनाली फौगाट, जो हिसार जिले से संबंध रखती थी। टिकटॉक स्टार बनने के बाद बिग बॉस तक पहुंची। जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन किया और 2019 में आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ चुनाव लड़ा। देखा जाए तो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सोनाली फौगाट के फैन करोड़ों में हैं।

सोनाली फौगाट कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद से ही लगातार मुखर थी। कुलदीप जब भाजपा में आए तो भी सोनाली ने ट्वीट बम से अपनी बढ़ती राजनीतिक हैसियत दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। आखिरकार पिछले दिनों कुलदीप बिश्नोई को सोनाली फौगाट के दर पर जाना ही पड़ा। कुलदीप ने ट्विटर पर इसे मुलाकात की संज्ञा दी थी। इसके बाद कुलदीप के आग्रह पर सोनाली ने गुरु जंभेश्वर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत भी की, लेकिन यहां उन्हें उचित मान-सम्मान नहीं दिया गया। उनकी कुर्सी को एक तरफ लगवा दिया गया, जबकि माइक से ज्यादातर वक्ताओं ने उनका नाम तक नहीं लिया। यही नहीं सोनाली को मंच से संबोधन का मौका तक नहीं दिया गया। यहां सोनाली काफी नाराज भी हुई और बीच में ही चली गई।

सोनाली फौगाट ने इस पीड़ा को एक पत्रकार साथी के साथ फोन पर साझा करते हुए बताया था कि वह कुलदीप को जीतने नहीं देगी। कुछ न कुछ ऐसा जरूर करेगी, जिससे उसकी ताकत का डंका दूर तक बज सके। उन्होंने इस बीच यह भी जानकारी दी कि हुड्डा साहब का फोन आया था, कांग्रेस ज्वाइन करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन, मैंने टिकट मांगी है। जिस पर हुड्डा ने सर्वे करवाने की हामी भरी है और कहा है कि अगर सर्वे में जीत की संभावना नजर आएंगी तो टिकट भी दे देंगे।

इसी बीच 22 से 25 अगस्त के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते सोनाली अपने निजी सचिव सुधीर सांगवान के साथ गोवा गई थी और 23 की सुबह ही दुखभरी खबर आ गई। बताया जा रहा है कि सोनाली कुलदीप के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं थी। वे न सिर्फ उन्हें हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी, बल्कि अपनी पहुंच के चलते टिकट भी खुद लेने की पूरी कोशिश करती। ऐसे में किसी भी तरह की संभावना को नहीं नकारा जा सकता। वहीं, राजनीति के जानकार सोनाली की मौत के तुरंत बाद अनुराधा बाली उर्फ फिजा की मौत को भी याद कर रहे हैं। फिजा के साथ कुलदीप बिश्नोई के भाई तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने चांद मोहम्मद बन शादी की थी। हालांकि, बाद में वे अलग भी हो गए और अरसे बाद फिजा अपने ही निवास पर संदिग्ध हालत में मृत पाई गई थी। ऐसे में सोनाली की मौत को लेकर तरह-तरह के सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। पता तो यह भी चला है कि सोनाली व सुधीर सांगवान के साथ एक अन्य (एसएस) भी गोवा गए थे। यह एसएस उनके साथ ही गोवा में भी देखा गया था। इसके बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी हो सकती है।

सोनाली फौगाट की मौत को लेकर एक दूसरी थ्योरी भी सामने आ रही है। यह थ्योरी है सोनाली और भाजपा नेताओं का कनेक्शन। सोनाली 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट लेकर हैलीकॉप्टर से सीधे आदमपुर में उतरी थी। भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ सोनाली के दोस्ताना संबंध रहे। इनमें से कुछ नेता भाजपा के संगठन में रह चुके हैं तो कुछ प्रदेश सरकार में ओहदेदार भी हैं। कुछ नेताओं के साथ तो उनके बेहद करीबी संबंध भी बताए जाते रहे हैं। ऐसे में इस बात की संभावना भी हैं कि सोनाली के पास इन नेताओं के खिलाफ कुछ ऐसे सबूत भी हों, जो उन्हें कभी भी परेशानी में डालने के लिए काफी साबित हो सकते हों। ऐसे में कुलदीप बिश्नोई के भाजपा में आने के बाद संभव है कि सोनाली ने आदमपुर उपचुनाव में टिकट लेने के लिए उक्त नेताओं पर कोई प्रेशर न बना दिया हो और उन्होंने अपनी बदनामी से बचने के लिए सोनाली रूपी कांटे को निकालने के लिए ही कोई प्लानिंग न कर दी हो। यानी, कई राजनीतिक विश्वलेषक सोनाली फौगाट की मौत को राजस्थान के भंवरी देवी कांड से जोड़कर भी देख रहे हैं। सोनाली की मौत उन आईएएस, आईपीएस के लिए भी दुखभरी खबर है, जिनकी उनके साथ नजदीकियां मानी जाती रही हैं।

अब जिंदादिली के साथ जीने वाली सोनाली की मौत की जो शुरुआती वजह हार्ट अटैक बताई गई है, वही है या फिर कुछ और, यह जानना उनके हर प्रशंसक का अधिकार है। सोनाली को न्याय भी तभी मिलेगा, जब उनकी मौत से जुड़ी सभी सच्चाई बाहर आएं। ऐसे में देखना है कि सोनाली फौगाट की मौत का असली कारण जनता के बीच सामने आएगा या फिर फिजा की मौत की तरह हमेशा-हमेशा के लिए संदिग्ध ही रहेगा और लगातार चर्चाएं ही चलती रहेंगी

अजय दीप लाठर, लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी
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