हरियाणा

…तो देश के कृषि मन्त्री होते

 

  • चंडीगढ़ ब्यूरो

 

यदि 2014 के लोकसभा चुनावों में रोहतक की जनता ने ओमप्रकाश धनखड़ का साथ दिया होता तो निश्चित तौर पर धनखड़ देश के कृषि मंत्री होते, क्योंकि जब केंद्र की नरेंद्र मोदी (2014-19) सरकार में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह बने थे, राधा मोहन सिंह भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे और ओमप्रकाश धनखड़ किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं. लेकिन धनखड़ हरियाणा के कृषि, पंचायत, पशुपालन एवं सिंचाई मंत्री अवश्य बने. ओमप्रकाश धनखड़ ने प्रदेश के कृषि मंत्री के तौर पर कार्य करते हुए इतने महत्वपूर्ण कार्य किए जिसको गिनाने लग जाए तो कई किताबें छप सकती हैं, लेकिन यदि एक ही वाक्य में बात कहनी हो तो यह कहते हुए कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि ओमप्रकाश धनखड़ यानि किसानों के दिलों की धडक़न. हरियाणा के एक मात्र ऐसे मंत्री हैं ओमप्रकाश धनखड़ जिसके सरकारी आवास पर भी आपको गांवों और खेतों की खुशबु मिलेगी, हाथ से पशुओं का चारा काटने वाला गंडासा भी धनखड़ के आवास पर देखा जा सकता है. प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से कंधे से कंधा मिलाकर ग्रामीण हरियाणा की तस्वीर बदलने के लिए ओमप्रकाश धनखड़ दिनरात परिश्रम कर रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि 2022 तक देश के किसान की आमदनी दोगुनी कर देनी है, प्रधानमंत्री मोदी के इस सपने को पूरा करने के लिए हरियाणा इस दिशा में निरंतर काम कर रहा है. किसानों को कैसे आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाया जाए उस दिशा में हरियाणा में युद्धस्तर पर काम चल रहा है. धनखड़ के किसानों के प्रति किए जा रहे कार्य को देखते हुए आज उनको छोटा स्वामीनाथन तक कहते हैं. आज किसानों की फसलों के दाम डेढ़ गुना जो मिले हैं, उसके पीछे धनखड़ के संघर्ष का इतिहास रहा है, देश के गृह मंत्री व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जींद रैली में कहा था कि अतीत में ओमप्रकाश धनखड़ स्वामीनाथन रिपोर्ट के क्रियान्वयन के लिए देश भर में आंदोलन खड़ा करते रहे हैं. आज धनखड़ की देश में एक किसान नेता के तौर पर बड़ी पहचान बनी है. किसानों के लिए जो काम सीएम मनोहर लाल सरकार के कार्यकाल में हुए , आज तक के इतिहास में प्रदेश की किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं किया. प्रदेश के किसानों को अब तक 2504 करोड़ रुपए की राशि तो मुआवजे के रूप में वितरित की जा चुकी है, इतना ही नहीं किसान भाइयों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तीन सालों में 1140 करोड़ 98 लाख रुपए की राशि अलग से किसानों को मुआवजे के रूप में मिली है. इसके अलावा प्राकृतिक आपदा से हुई फसल क्षति के लिए प्रति एकड़ 12000 रुपए का मुआवजा दिया जाता है.नहीं तो पूर्व की हुड्डा सरकार  किसानों को 2 और 3 रुपए के मुआवजे के चेक देती थी.

प्रदेश की मनोहर लाल सरकार ने तय किया कि मुआवजे के रूप में किसी को भी 500 रुपए से कम का चेक नहीं दिया जाएगा, प्राकृतिक आपदा से उसकी फसल बर्बाद हो जाती है तो किसान को 12 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मिलेगा ही और यदि जो किसान पानी की वजह से अपनी फसल की बिजाई नहीं कर सकता और उसकी जमीन खाली रह जाती है उसको 6 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा. किसान निधि योजना से किसान परिवार को हर साल 6 हजार रुपये बतौर आर्थिक मदद के रूप में मिलेंगे और हर चार महीने बाद 2 हजार की किश्त उनके खातों में मिलेगी. हरियाणा सरकार ने इस वर्ष बजट में 1500  करोड़ का अलग से प्रावधान किया है.

 

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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