हितेन्द्र पटेल
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May- 2026 -21 Mayपरती परिकथा
फासिज्म का आरोप और भारतीय लोकतन्त्र
भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहाँ वैचारिक संघर्ष हमेशा बहुस्तरीय रहे हैं। स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय से ही राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, सांस्कृतिक पहचान और लोकतन्त्र की विभिन्न अवधारणाएँ एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करती रही हैं।…
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Apr- 2026 -29 AprilUncategorized
अँधेरा, बाजार और बदलती संस्कृति
मुख्यधारा के सिनेमा की रणनीति यह है कि वह दर्शकों को माध्यम बनाता है। ब्रजेश्वर मदान (1953–2017; 1987 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ फिल्म क्रिटिक का पुरस्कार मिला था) ने ऐसा लिखा है। वे आगे कहते हैं कि दर्शकों को एक खेल…
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Nov- 2025 -25 Novemberमीडिया
समाज को समझने के लिए लोकप्रिय फ़िल्मों का अध्ययन
सिनेमा सामाजिक परिवर्तन के लिए काम करने वालों के लिए एक सशक्त माध्यम है। समाज में जो चल रहा है और जिस तरह की आकांक्षाएं उस समय के लोगों के मन में पल रही हैं इसकी समझ के लिए सिनेमा…
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Mar- 2025 -23 Marchपरती परिकथा
नये राजनीतिक इतिहास की जरूरत
राजनीतिक इतिहास के पुनर्लेखन के बिना आज की राजनीतिक स्थिति में आए गुणात्मक अन्तर की पहचान मुश्किल है। आज सिर्फ राजनेतागण पार्टी लाइन पर विभाजित नहीं हैं, उस पर विचार करने वाले पत्रकार और बुद्धिजीवी भी राजनीतिक पार्टी लाइन…
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Sep- 2024 -15 SeptemberUncategorized
पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान, बाँग्लादेश
हम आज जिस मुल्क को बाँग्लादेश कहते हैं उसका जन्म पाकिस्तान आन्दोलन से शुरू हुआ था या कम से कम जुड़ा हुआ था या नहीं इसपर विचार करने की जरूरत है। इस कठिन प्रश्न के उत्तर देने से बचने…
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Aug- 2024 -3 Augustशख्सियत
राजनीति, साहित्य और स्वाधीनता
क्या राजनीतिक स्वाधीनता और साहित्यिक स्वतन्त्रता में कोई अन्तर है? क्या भारत में साहित्यकारों ने भी स्वतन्त्रता उसी समय पाई जब भारत राजनीतिक रूप से स्वाधीन हुआ, यानि 15 अगस्त, 1947 को? आम तौर पर लेखकीय स्वतन्त्रता को देश…
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May- 2024 -27 Mayएतिहासिक
स्वाधीन भारत, आपातकाल और लोकतान्त्रिक आन्दोलन
1974 में भारत में निरंकुश राजनीतिक सत्ता के विरुद्ध छात्रों ने एक आन्दोलन किया था जो गुजरात से शुरु हुआ और बाद में बिहार व अन्य राज्यों में फैला। इस आन्दोलन ने इन्दिरा गाँधी और उनके पुत्र के विरुद्ध…
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Jan- 2024 -23 Januaryकर्पूरी ठाकुर
सामजिक न्याय का सच्चा सिपाही
कर्पूरी ठाकुर (1924-1988) को अत्यंत पिछड़ी जाती के राजनेता के रूप में देखना उनके राजनीतिक संघर्ष और उनके जीवन को संकीर्ण दृष्टि से देखना है। उन्हें एक ऐसे जननायक के रूप में देखा जाना चाहिए जो गरीबों की लड़ाई…
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May- 2023 -7 Mayशख्सियत
अलविदा रणजीत गुहा : तुमसा धीरज वाला इतिहासकार होगा कौन जमाने में!
रणजीत गुहा (1922 -2023) भारतीय इतिहासकारों में सबसे अधिक आयु तक जिए और उनका महत्त्व आयु के बढ़ने के साथ कम नहीं हुआ। देखा जाए तो उनके अधिकतर काम उनके रिटायरमेंट के आसपास या उसके बाद ही आए। ऐसा…
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Jun- 2022 -5 Juneसामयिक
भारतीय मुसलमानों के समक्ष चुनौतियाँ
भारतीय मुसलमान कहने पर ‘भारतीय’ ज्यादा महत्त्वपूर्ण है या ‘मुसलमान’ इस प्रश्न के साथ ही समस्या शुरू हो जाती है। जो लोग यह मानते हैं कि मुसलमान होने का मतलब ही है एक ऐसे धर्म को मानने वाले जो…
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