अमिता
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Feb- 2021 -14 Februaryसामयिक
प्यार या व्यापार
बदलते समय के साथ सबकुछ बदलते जा रहा है। इस बदलाव से प्रेम अथवा प्रेम की परिभाषा भी अछूता नहीं रहा है। घर में और अपने आस-पास कई शादियां तय होते हुए देखा मैने, जिसमें पहली शर्त होती है,…
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Dec- 2020 -6 Decemberशख्सियत
कहाँ वे चले गये
बात 2, 3 मार्च 2011 की है। अवसर था राजीव गाँधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बिकापुर (छ.ग.) में मीडिया पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का। उस दौरान मैं महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा से जनसंचार में पीएच.डी. कर रही थी।…
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Oct- 2020 -14 Octoberमुद्दा
व्यवस्था के मारे किन्नर
समाज अथवा देश को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियम-कानून या व्यवस्था आवश्यक होता है। किन्तु किसी भी समाज में व्यवस्था को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। यदि व्यवस्था सही न हो तो आम जनता…
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Sep- 2020 -9 Septemberसामयिक
उपभोक्ताओं पर मंडराता ठगी का जाल
सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में मोबाइल जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, जिसके बिना एक पल भी रहना लोगों को मुश्किल लगने लगा है। यदि यह कहें कि मोबाइल के बिना जीवन की कल्पना असम्भव प्रतीत…
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Jul- 2020 -25 Julyशख्सियत
चीरहरण के वे सवाल
भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति प्रारम्भ से ही हाशिए पर रही है। शोषण, अत्याचार तो जन्म के साथ ही इनके नसीब में जुड़ जाता है। महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती घटनाएँ और हिंसा भी कोई नयी बात…
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Jun- 2020 -5 Juneपर्यावरण
पर्यावरण और आधी आबादी
अमिता पर्यावरण मनुष्य के जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। मनुष्य प्रारम्भ से ही प्रकृति को पूजता रहा है क्योंकि मनुष्य प्रकृति पर पूरी तरह से निर्भर है। कहीं सुहागन अपनी सुहाग की लम्बी उम्र के लिए वट-सावित्री व्रत…
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May- 2020 -19 Mayसामयिक
सिस्टम के कंधे पर लाशों का बोझ
बिहार के ‘माउंटेन मैन’, दशरथ माँझी को शायद ही कोई होगा, जो नहीं जानता होगा। उस समय लोग इनसे और भी अच्छे से परिचित हो गये, जब नवाजुद्दीन सिद्दकी जैसे कलाकार ने उनके जीवन को परदे पर पुन: जीवन्त…
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2 Mayशख्सियत
ये अरमाँ है शोर नहीं हो, खामोशी के मेले हों
इस महामारी और लॉकडाउन के दौर में हम लगातार कई सदमे से गुजर रहे हैं। इन सबके बीच पता नहीं था कि दो सदमे ऐसे भी मिलेंगे, जिससे उबर पाना बेहद मुश्किल है। वे भी तब, जब आप चारदीवारी…
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Apr- 2020 -26 Aprilसामयिक
सोशल डिस्टेंसिंग बनाम क्लास डिस्टेंसिंग
आज पूरी दुनिया एक विचित्र चिन्ता में डूबी हुई है। जाति, धर्म, आतंकवाद आदि से परे अधिकांश इसी ख्याल में खोये हैं कि कोरोना से कैसे मुक्ति पायी जाए? कोरोना महामारी ने सिर्फ हमारे देश को ही नहीं, बल्कि…
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14 Aprilसामयिक
समय का ये पल थम सा गया
आज हम एक ऐसे समय से गुजर रहे हैं, जहाँ सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भय के माहौल में सिमटा हुआ है। कुछ लापरवाही कहें या गैर-जिम्मेदारी, कारण कुछ भी हो लेकिन सच्चाई सिर्फ यह है कि…
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