अमिता
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Sep- 2022 -5 Septemberशिक्षा
दम तोड़ती शिक्षण व्यवस्था और शिक्षक
‘‘राजा बोला- ‘रात है’ मंत्री बोला-‘रात है’ एक-एक कर फिर सभासदों की बारी आई उबासी किसी ने, किसी ने ली अँगड़ाई इसने, उसने-देखा-देखी फिर सबने बोला– ‘रात है…’ यह सुबह-सुबह की बात है…’’ गोविंद प्रसाद जी की ‘तीसरा पहर…
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Aug- 2022 -14 Augustमीडिया
मीडिया: मिशन से प्रोफेशन तक का सफर
आज पूरे देश में आजादी के अमृत महोत्सव की चर्चा और उत्सव दोनों ही चरम पर है। इस महोत्सव के माध्यम से लोगों को देशभक्ति की भावना से जोड़ने की एक अच्छी पहल की जा रही है। इस उत्सव…
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May- 2022 -3 Mayमीडिया
प्रेस की स्वतन्त्रता बनाम बाध्यता
हमारे जीवन में प्रेस का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आज भी अधिकांश लोग दिन की शुरूआत अखबारों से ही करते हैं। समाज में सजगता और जागरूकता बनाये रखने में इसका उल्लेखनीय योगदान है। इसीलिए प्रेस को लोक प्रहरी…
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Mar- 2022 -8 Marchसामयिक
पूर्वाग्रह की जंजीरों के बीच संघर्ष के बीज
पिछले कुछ दशकों से देश-दुनिया में विभिन्न दिवसों को मनाने का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। इसी के तहत 8 मार्च महिला दिवस के रूप में लंबे समय से मनाया जा रहा है, जिसके लिए हर बार एक…
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Nov- 2021 -19 Novemberसामयिक
पुरुष दिवस के मायने
एक दिन सुबह अखबार के पन्ने पलटते हुए अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के बारे में पढ़ने का मौका मिला। महिलाओं के लिए तो एक दिन ‘महिला दिवस’ के रूप में लम्बे समय से मनाया जाता रहा है, जो सर्वविदित है।…
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Feb- 2021 -14 Februaryसामयिक
प्यार या व्यापार
बदलते समय के साथ सबकुछ बदलते जा रहा है। इस बदलाव से प्रेम अथवा प्रेम की परिभाषा भी अछूता नहीं रहा है। घर में और अपने आस-पास कई शादियां तय होते हुए देखा मैने, जिसमें पहली शर्त होती है,…
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Dec- 2020 -6 Decemberशख्सियत
कहाँ वे चले गये
बात 2, 3 मार्च 2011 की है। अवसर था राजीव गाँधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बिकापुर (छ.ग.) में मीडिया पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का। उस दौरान मैं महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा से जनसंचार में पीएच.डी. कर रही थी।…
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Oct- 2020 -14 Octoberमुद्दा
व्यवस्था के मारे किन्नर
समाज अथवा देश को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियम-कानून या व्यवस्था आवश्यक होता है। किन्तु किसी भी समाज में व्यवस्था को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। यदि व्यवस्था सही न हो तो आम जनता…
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Sep- 2020 -9 Septemberसामयिक
उपभोक्ताओं पर मंडराता ठगी का जाल
सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में मोबाइल जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, जिसके बिना एक पल भी रहना लोगों को मुश्किल लगने लगा है। यदि यह कहें कि मोबाइल के बिना जीवन की कल्पना असम्भव प्रतीत…
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Jul- 2020 -25 Julyशख्सियत
चीरहरण के वे सवाल
भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति प्रारम्भ से ही हाशिए पर रही है। शोषण, अत्याचार तो जन्म के साथ ही इनके नसीब में जुड़ जाता है। महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती घटनाएँ और हिंसा भी कोई नयी बात…
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