मुद्दा

आन्दोलन के नाम पर अश्लील अराजकता

आहत अकादमिक वातावरण से उपजे सवाल 

 

पिछले मार्च महीने में तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में दो बड़ी सुखद-दुखद घटनाएँ हुईं, जिनपर सबका ध्यान है। 18-19 मार्च को रेणु की जन्म शती के अवसर पर दो दिनों की राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने वाला देश का यह पहला विश्वविद्यालय है, जिसका सारा श्रेय हिन्दी विभाग के अध्यापकों , शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं को है। विभाग में फिलहाल चार अध्यापक हैं – विभागाध्यक्ष प्रो योगेन्द्र, प्रो बहादुर मिश्र, सहायक प्रोफेसर शुभमश्री और दिव्यानन्द देव। पिछले वर्ष बिहार के विश्वविद्यालयों में जिस निष्पक्षता से योग्य, सुयोग्य ,केवल प्रतिभावान अध्यापकों की नियुक्तियाँ हुई हैं, उसकी सबने प्रशंसा की है। शुभमश्री एवं दिव्यानन्द देव – दोनों ओनजीसी में सूरत और आंध्र प्रदेश में राजभाषा अधिकारी थे, पर इन्होंने अच्छी ख़ासी नौकरी छोडकर अध्यापन कार्य को प्राथमिकता दी।

          प्रो योगेन्द्र हिन्दी विभाग के अध्यक्ष हैं। ऐसा समर्पित, न्यायप्रिय, ईमानदार, सत्यनिष्ठ, अध्ययनशील, कर्तव्यनिष्ठ, मूल्यसापेक्ष, पारदर्शी व्यक्तित्व वाले स्वाभिमानी और सामाजिक शैक्षिक रूप से सर्वाधिक सक्रिय प्रोफेसर बिहार के विश्वविद्यालयों में शायद दो चार ही होंगे। डी एस डब्ल्यू के रूप में उनका कार्य प्रशंसीय और अनुकरणीय है।

          तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के टी एन बी कॉलेज में मैंने 22 वर्ष तक अध्यापन किया है। मेरे पाँच छात्र इस विश्व विद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। देश भर में अनेक ऐसे पत्रकार,  लेखक,  साहित्यकार,  कवि,  प्रोफेसर,  समाजसेवी, संस्कृति कर्मी,  वैज्ञानिक,  डाक्टर,  ईंजीनियर, बड़े ब्यूरोक्रैट्स, जज आदि हैं, जो कभी भागलपुर में मेरे छात्र थे। उनका आज भी जैसा स्नेह और आदर मुझे प्राप्त है, वह कल्पनातीत है। इस विश्वविद्यालय का हिन्दी विभाग कई विश्व विद्यालयों के हिन्दी विभाग से बेहतर है। प्रो दिव्यानन्द देव के साथ 26 मार्च को हुई घटना की मैं निंदा और भर्त्सना करता हूँ एवं सभी प्रोफेसरों, रिसर्च स्कालरों और छात्र-छात्राओं से तबतक सक्रिय अहिंसक विरोध प्रदर्शन की आशा रखता हूँ, जबतक अपराधियों, उत्पातियों को दण्डित न किया जाय।

          विश्व विद्यालय की मर्यादा और उसके अकादमिक वातावरण की रक्षा का दायित्व कुलाधिपति ,कुलपति और  विश्व विद्यालय के अधिकारियों पर भी है। 26 मार्च की घटना से तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हुई है। 23 मार्च को बिहार विधान सभा में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल विधेयक के विरोध में जो दृश्य सबने देखा, सुना और पढ़ा उससे बिहार विधान सभा की गरिमा नष्ट हुई। विधान सभा में पुलिस बुलाई गई , विधायकों को धक्के मार कर बाहर किया गया, जिसके विरोध में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादय ने 26 मार्च को बिहार बन्द का आह्वान किया। विश्व9विद्यालय के अध्यापक बन्द के समर्थन में होने के बाद भी अपनी मर्जी से कक्षाएँ स्थगित नहीं कर सकते थे। छात्र छात्राएँ 20, 30 किलोमीटर से पढ़ने आते हैं। वे उस दिन भी आए। हिन्दी विभाग की पहली कक्षा प्रो बहादुर मिश्र ने ली थी। दूसरी कक्षा दिव्यानन्द देव की थी। सेमेस्टर तीन में छात्र- छात्राओं की संख्या कम थी और सेमेस्टर दो में अधिक। 26 मार्च सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा की जन्म तिथि है। दिव्यानन्द देव  ने अपनी कक्षा में विचार आरंभ किया था। बारह बजे के करीब लगभग दो दर्जन छात्र दरवाजे पर लात पीटकर उनके व्याख्यान कक्ष में घुसे, उनको खीच कर बाहर ले गए और उन्हें मारा पीटा। इन छात्रों ने प्रो योगेन्द्र और दिव्यानन्द देव से कक्षा स्थगित करने का आग्रह भी नहीं किया। कक्षा से शिक्षक को खीच कर बाहर लाकर पीटना विश्व विद्यालय के लिए शर्म की बात है।

बिहार में भाजपा-जदयू की सरकार है और विपक्ष में राजद, काँग्रेस एवं वाम दल एक साथ हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालय में अपराधी, हिंस्र, उद्दंड एवं उत्पाती छात्रों को प्रश्रय कौन देता है? विश्वविद्यालय को विष-विद्यालय कौन बनाता है ? मार पीट की घटना के बाद भी प्रो दिव्यानन्द देव ने कक्षा में आकर छात्रों को पढ़ाया। मारने वालों पर उन्होंने उसी दिन तुरत एफ आई आर दायर की । यह एफ आई आर लालू यादव, चन्दन यादव, दिलीप यादव, उमर  ताज, मिथुन कुमार यादव, शिशिर रंजन सिंह, प्रिंस कुमार ,नीतीश कुमार एवं अन्य अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ है। इस एफ आई आर को तातारपुर (यूनिवर्सिटी) के पी एस केस न. 67/ 2021 दिनांक 26.3.2021 को यू एस 147/ 149/ 341/ 323 / 353 / 504 आई पी सी के तहत रजिस्टर्ड किया गया और इस केस की जांच राजदेव यादव को दी गई। 26 मार्च को ही 20,30 नवनियुकत सहायक प्रोफेसर विश्व विद्यालय परिसर में दिव्यानन्द देव के समर्थन में पहुंचे। कुलपति ने पाँच अध्यापकों से भेंट कर प्रौक्टर को एक अनुशासन समिति गठित करने की सलाह दी। 27 मार्च को समिति ने बैठक भी की पर अभी तक विश्वविद्यालय ने आरोपी छात्रों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। इस घटना की राजद के उच्च पदाधिकारियों ने अभी तक न तो कोई निन्दा की है और न अपने कार्यकर्ताओं को दण्डित किया है। राजद के राज्य सभा सांसद मनोज झा स्वयं दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क में प्रोफेसर हैं। वे 2018 से  राज्य सभा के सदस्य हैं। राजद के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह, राजद के राष्ट्रीय  प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकि, राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक एवं प्रदेश प्रधान महासचिव आलोक मेहता ने अभी तक इस घटना के विरोध में कोई बयान नहीं दिया है। राजद में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के कई नेता बड़ी संख्या में शामिल हों चुके हैं और अब पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के कई नेता भी राजद की सदस्यता लेंगे। भागलपुर विश्व विद्यालय की ऐसी घटना से राजद की छवि पर प्रभाव पड़ेगा। विश्वविद्यालय के छात्र और छात्र संगठन, अध्यापक और अध्यापक संगठन भी इस घटना के विरुद्धा एक जुट हो रहे हैं। हिन्दी विभाग के समस्त विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अपने संयुक्त वक्तव्य में इस घटना को विश्वविद्यालय के लिए ‘एक शर्मनाक काला अध्याय के समान ‘ मान कर सभी छात्र- छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों से संवैधानिक तरीके से इस घटना का शान्तिपूर्वक विरोध करने को कहा है।

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          यह दुखद है कि छात्र राजद के विश्वविद्यालय अध्यक्ष, अंग क्रांति सेना के राष्ट्रीय संयोजक आदि ने छात्रों पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 26 मार्च की घटना के कई दिन बाद अंग क्रांति सेना के विश्वविद्यालय सचिव गौतम कुमार पासवान ने मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी , भागलपुर को दिये अपने आवेदन में प्रोफेसर योगेन्द्र एवं दिव्यानन्द देव पर दलित उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाकर जाति उत्पीड़न से सम्बन्धित कानून के तहत इनपर कार्रवाई करने की मांग की है , जिससे ये दोनों प्रोफेसर एस सी एस टी एक्ट में फँस जाएँ ।

          तिलका मांझी विश्व विद्यालय की कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता और अनुशासन समिति को न्याय कर ऐसे छात्रों को दण्डित करना चाहिए । राजद के छात्रों और अंग क्रांति सेना के लोगों को अपनी गलती स्वीकारनी चाहिये। 5 अप्रैल को भूटा, भूस्टा की संयुक्त बैठक का एक मात्र एजेंडा यही होना चाहिए। विश्व विद्यालय में भय की संस्कृति विकसित करने वालों के विरुद्ध सभी छात्रों, अध्यापकों का एकजुट होना अनिवार्य है।

          भागलपुर विश्व विद्यालय की यह घटना देश भर में सोशल मीडिया पर चर्चा में है। विश्व विद्यालय की छवि बचनी चाहिये। विश्व विद्यालय के कुलपति और अधिकारी ऐसे उत्पातियों के खिलाफ शीघ्र निर्णय लें। राजद के नेताओं को अपने ऐसे कार्यकर्ताओं पर तुरत अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिये। प्रोफेसर को पीटने वाले को क्या कहा जाय ? छात्र-नेता, राजनीतिक दल का कार्यकर्ता या उत्पाती अपराधी ?          

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लेखक जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं। सम्पर्क +919431103960, ravibhushan1408@gmail.com

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