सिनेमा

बेमतलब, बेमक़सद ‘राधे’

 

{Featured in IMDb Critics Reviews}

 

निर्देशक – प्रभु देवा
स्टार – सलमान ख़ान, दिशा पटानी, रणदीप हुड्डा, जैकी श्रॉफ, जैकलीन फर्नांडिस, प्रवेश राणा, सिद्धार्थ जाधव आदि

इसका थोबड़ा पसन्द नहीं।
शेयर मत करो।
बचा लो भाई प्लीज़।
हमारा आना जाना मुश्किल हो गया है।
कुछ तो करूंगी तुम्हारे लिए।
मैं ये नौकरी छोड़ना चाहता हूं।
अपनी जिन्दगी जियो।
अभी कुछ मत बुक करना।

ये सब डायलॉग है आज ज़ी के नेटवर्क पर पे पर व्यू के आधार पर रिलीज हुई फ़िल्म ‘राधे योर मोस्ट वांटेड भाई’ के। क्या आपको कुछ समझ आ रहा है इन डायलॉग से अगर हाँ तब आप समझदार हैं और अगर नहीं तो आप बुद्धिजीवी हैं। दरअसल ये सब डायलॉग को अपने ऊपर लागू करके देखना कसम से तुम भी कह उठोगे यही सब।

कहोगे कि – हमें इसका थोबड़ा पसन्द नहीं।
फ़िल्म के बारे में शेयर मत करो।
बचा लो भाई प्लीज़ अपना रुपया।
हमारा आना जाना मुश्किल हो गया है नहीं भाई हमारा देखना मुश्किल हो गया है।
कुछ तो करूंगी तुम्हारे लिए, एक काम कर बहन एक्टिंग छोड़ दे।
मैं ये नौकरी छोड़ना चाहता हूं और हम तुम्हारी फ़िल्म देखनी छोड़ने वाले हैं।
अपनी जिन्दगी जियो – सही है हमें भी जीने दो।
अभी कुछ मत बुक करना – ‘नहीं-नहीं टिकट भी बुक मत करना।’
राणा हैलीकॉप्टर तैयार रख। मैं कहता हूं भाई इस फ़िल्म को देखते वक्त एक डिस्प्रिन की गोली तैयार रख।

वैसे एक से भी कुछ नहीं होगा। एक काम करना फ़िल्म देखते-देखते हर थोड़ी देर बार एक गोली पानी से लेते रहना तब जाकर यह शायद आपके दिमाग के सहारे दिल में उतर सके। लेकिन हम क्या करें हम तो समीक्षक हैं देखना तो पड़ेगा और लिखना भी पड़ेगा फिर आप बोलोगे कि हमें बताया नहीं।

इस फ़िल्म के साथ भी ऐसा ही है। हालांकि शुरुआत के पांच मिनट अच्छा लगा उसके अलावा रणदीप हुड्डा और सलमान खान के कुछ फाइट सीन ठीक लगे। लेकिन 135 मिनट की फ़िल्म में 5-7 मिनट ही आपको ठीक लगे बाकी समय सिरदर्द तो फिर आप भी लड़ने मत लग जाना ईद के अवसर पर।

फ़िल्म में एक हीरोइन है जो एक्टिंग छोड़ सब करती है। बेवजह मदद करती है, बेवजह प्यार करती है, बेवजह गंदा नाच करती है। एक हीरो वो भी उसी राह पर है। तीसरा थोड़ा ठीक लगा क्योंकि वो विलेन है। और एक वही है जिसके लिए 1 स्टार दे दिया। चौथा हीरोइन का भाई जिसका दिमाग सेट नहीं लगता, झूठा भी लगता है। और एक बात बताओ ये लेटकर जूता पहनने की क्या जरूरत थी भाई?

गाने बकवास, कहानी है नहीं कोई सिरे की, बैकग्राउंड ऐसा की दिमाग खराब, बवाल और सीटी मार नहीं चार जूते मार। स्टूडेंट से मदद लेना रिस्क नहीं है- कोई रिस्क नहीं है सर। लेकिन इस फ़िल्म को देखने में रिस्क जरूर है। और ये दुबई वाले इतना क्यों चिल्ला रहे थे दुबई में कौन फ़िल्म समीक्षक है पता करो भाई। ईद के दिन भी ये मार-पीट रुचती नही बल्कि आपकी ईद का मजा जरूर किरकिरा करती है।

अपनी रेटिंग – 1 स्टार

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लेखक स्वतन्त्र आलोचक एवं फिल्म समीक्षक हैं। सम्पर्क +919166373652 tejaspoonia@gmail.com

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