Uncategorizedचर्चा मेंस्तम्भहरियाणा

पैड-मैन कोई बैड-मैन नहीं, गुड मैन है जनाब! 

अक्षय कुमार की फ़िल्म पैड मैन का शानदार ट्रेलर ट्विटर पर देखा। इस फ़िल्म का निर्देशन मशहूर ऐड फ़िल्म मेकर आर. बाल्की ने किया है, जिन्होंने अमिताभ बच्चन को लेकर पा जैसी संवेदनशील फ़िल्म बनाई थी।

क्या है पैडमैन की कहानी?

ये फिल्म अरणांचलम मुरगननाथम के जीवन पर आधारित है। वे कोयमंबटूर के निवासी हैं।उन्होंने पहली बार देश में किफायती कीमत वाले सेनेटरी नैपकीन इजाद की थी। ट्विंकल खन्ना ने ‘द लीजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद’ नाम की एक किताब लिखी है, जिसमें अरणांचलम मुरगननाथम की कहानी बताई गई है। यह फिल्म बतौर प्रोड्यूसर ट्विंकल की पहली फ़िल्म है।

ट्विंकल ने दिया था पैडमैन का आइडिया- अक्षय

फिल्म के बारे में बात करते हुए अक्षय ने कहा था- फिल्म का आइडिया ट्विंकल ने दिया था। मेरे अंदर इस फिल्म के लिए मोटिवेशन मेरे घर की महिलाओं से आया। ट्विंकल महिलाओं से जुड़ी हर समस्या के बारे में मुझसे बात करती हैं। भारत में आज भी 91% महिलाएं पैड की इस्तेमाल नहीं करती हैं, क्योंकि उनके पास इसके लिए पैसे नहीं हैं. इसकी समस्या टॉयलेट से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है।

हरियाणा से क्या है आज पैडमैन का रिश्ता ?

सवाल ये है कि ढाई करोड़ की आबादी वाले हरियाणा प्रदेश के संदर्भ में आज मैं पैड मैन की चर्चा क्यों कर रहा हूँ? क्योंकि हरियाणा सरकार ने हाल ही में स्कूली छात्राओं और बीपीएल महिलाओं के लिए फ्री नैपकिन्स बांटने का ऐलान किया है। ये क्रांतिकारी साबित होगा, शुक्रिया मनोहर लाल।
पैड मैन अरुणाचलम मुरुगनाथन जिस तमिलनाडु से बिलॉन्ग करते है, उसकी राजधानी चेन्नई से निकलने वाले प्रतिष्ठित अखबार दी हिन्दू ने हरियाणा की इस ऐतिहासिक इबारत को प्रमुखता दी है। हरियाणा एडीशन के तमाम बड़े अखबार जब टिम्बर ट्रेल के कमरों का किराया जोड़ने में व्यस्त हैं, तब दी हिन्दू को इस खबर की प्रमुखता समझना सुकून देता है।
पैड मैन के हीरो के बारे में ये टैगलाइन है कि वाकई सुपर स्टार है ये पगला! वाकई सुपर हीरो वाला ही काम है जनाब। हर महीने 5 दिनों में जितना रक्त एक महिला का बह जाता है, उतना आधे घंटे एक पुरुष का बह जाए तो मौत हो जाएगी।

हरियाणा की महिलाओं के लिए वाकई ये एक क्रांतिकारी बदलाव है। सैनिटरी नैपकिन की योजना उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी है पर फ्री नहीं है, 6 रुपये वसूले जाते हैं।हरियाणा में बिल्कुल फ्री है, जो लाखों महिलाओं को अब इंफेक्शन और कई घातक बीमारियों से बचाएगा।

हरियाणा की बेटी मानुषी छिल्लर ने हाल ही में मिस वर्ल्ड का खिताब जीता है, जिसपर हम सब को नाज़ है। मानुषी शक्ति नाम से एक अभियान चलाती हैं, जिसका उद्देश्य सभी महिलाओं को सस्ता नैपकिन उपलब्ध कराना है। मानुषी के इसी अभियान को शक्ति देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुरुक्षेत्र में उनकी मौजूदगी में ही फ्री नैपकिन योजना का ऐलान किया। मानुषी की उपलब्धि को इससे बड़ा सम्मान और सहयोग हो नहीं सकता था, 500 गज का प्लॉट इस सम्मान के सामने कितना ओछा है!

महिलाओं के सम्मान के साथ साथ इस योजना में रोजगार और बिजनेस ओपॉर्चुनिटी भी मैं देखता हूं। सैनिटरी नैपकिन जिस कॉटन यानी नरमा कपास से बनता है, उसकी खेती हमारे 4 जिलों में , सिरसा से लेकर चरखी दादरी तक खूब होती है। लेकिन आज इसका रकबा तेजी से घट रहा है। जीनिंग उद्योग दम तोड़ रहा है। इसे पुनर्जीवन मिल सकता है, बशर्ते कि सरकार इस उद्योग को संरक्षण दे।

मार्किट फीस की विसंगतियों ने इस उद्योग का बुरा हाल कर रखा है। हमारी कॉटन बेल्स और रॉ कॉटन भी सस्ते में दूसरे प्रदेशों में बेचा जा रहा है।सरकार ये नीति बनाए की ये नैपकिन्स हरियाणा में ही बनें और यहीं से खरीदकर सरकार बांटे, आखिर कहीं न कहीं से तो टेंडर निकालकर खरीदेगी ही! कई स्टार्ट अप हरियाणा में ही शुरू किए जा सकते हैं। प्रदेश के खजाने का पैसा प्रदेश के ही व्यापार को जाएगा और किसान को भी बेहतर मूल्य मिलेगा।

खैर बात पैड मैन से शुरू हुई थी। मनोहर सरकार अगर इस योजना को सफलता पूर्वक लागू कर लेती है,तो ये हरियाणा प्रदेश के लिए साइलेंट रेवोल्यूशन साबित होगी। प्रदेश की आधी आबादी का जीवन बदल जायेगा, ऐसा होगा हमारे सपनों का हरियाणा।

ऋषि- पांडेय

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

+919996466634

कमेंट बॉक्स में इस लेख पर आप राय अवश्य दें। आप हमारे महत्वपूर्ण पाठक हैं। आप की राय हमारे लिए मायने रखती है। आप शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा।
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments


डोनेट करें

जब समाज चौतरफा संकट से घिरा है, अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं, मीडिया चैनलों की या तो बोलती बन्द है या वे सत्ता के स्वर से अपना सुर मिला रहे हैं। केन्द्रीय परिदृश्य से जनपक्षीय और ईमानदार पत्रकारिता लगभग अनुपस्थित है; ऐसे समय में ‘सबलोग’ देश के जागरूक पाठकों के लिए वैचारिक और बौद्धिक विकल्प के तौर पर मौजूद है।
sablog.in



विज्ञापन

sablog.in






0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x