सिनेमा

जेंडर सेंसिटिविटी का मुद्दा उठाती ‘पति पत्नी और पंगा’

 

{Featured in IMDb Critics Reviews}

 

स्टार कास्ट : अदा शर्मा, नवीन कस्तूरिया, अल्का अमीन, हितेन तेजवानी और गुरप्रीत सैनी
निर्माताः जय साहनी, सोना साहनी और आरूषी मेहता
लेखक व निर्देशकः अबीर सेन गुप्ता
अपनी रेटिंग – 2.5

 

वर्तमान समाज में जेंडर सेंसिवटी के मुद्दे पर बात किए जाने की जरूरत बढ़ती जा रही है। फिर भले ही समाज कितना भी खुद को आधुनिक क्यों न मानता हो। वह अभी भी LGBTQ के बारे में बात करने को तैयार नहीं है। आज भी ‘एमएक्सप्लेअर’ की नयी ऑरिजनल वेब सीरीज ‘पति पत्नी और पंगा’ इसी बात पर थोड़े हल्के-फुल्के तरीके से बात करती दिखाई देती है। ख़ैर एक लड़की है जो पहले लड़का थी और अब लड़की बनकर शादी कर लेती है कुछ ऐसी ही कहानी है इस वेब सीरीज की फिर भी थोड़ी सी कहानी जान लीजिए।

एक लड़का है मुंबई में जो रीयल एस्टेट ब्रोकर का काम करता है नाम है रोमाँचक अरोड़ा (नवीन कस्तूरिया) जिसकी अपनी ‘‘लवली प्रापर्टीज’’ नामक एक छोटी सी दुकान है और उसी दुकान पर एक दिन एक लड़की आती है खूबसूरत सी नाम है शिवानी भटनागर (अदा शर्मा)। लड़की अकेली है इसलिए उसे कोई कमरा नहीं देना चाहता उसे कमरे न देने के पीछे भी लोगों के अपने-अपने कारण हैं। तब रोमाँचक उर्फ रोमू का दोस्त जीतू (गुरप्रीत सैनी) उसे सलाह देता है कि क्यों नहीं रोमू  खुद के घर में उसे किराए पर कमरा दे दे। इसके लिए रोमू के पिता और माँ भी तुरंत तैयार हो जाते हैं। उनको यह भी डर है कि कहीं उनका बेटा गे (समलैंगिक) न बन जाए। इसलिए भी वे लोग शिवानी को कमरा देने के लिए तैयार हो जाते हैं। थोड़े ही दिन में शिवानी और रोमू करीब आते हैं, दोनों के बीच सेक्स होता है और फिर दोनों की शादी। मगर शादी के बाद रोमू को पता चलता है कि शिवानी दरअसल शिव था जिसने सर्जरी के जरिए शिवानी का रूप ले लिया है। बस यहीं से दोनों के रिश्ते में खटास आ जाती है। अब आगे क्या होगा जानने के लिए आपको सीरीज के लास्ट तक जाना पड़ेगा।

वेब सीरीज  जेंडर सेंसिटाइजेशन पर खुलकर बात करती है लेकिन कॉमिक के साथ। और इस तरह के कॉमिक सीन रचने के लिए डायरेक्टर अबीर सेनगुप्ता ने बेहूदा और अजीब सीन का सहारा क्यों लिया है ? यह बात समझ से परे है।2 Reasons Why Pati Patni Aur Panga is Misogynistic and Transphobic - Just for Movie Freaks

अदा शर्मा पूरी सीरीज में खूबसूरत लगी हैं साथ ही जब-जब उनके किरदार के साथ खड़े होने की बारी आती है तो वे अपने किरदार के साथ न्याय करती भी नजर आती हैं। इसके अलावा नवीन कस्तूरिया एक अच्छे कलाकार की भूमिका में हैं और इससे पहले भी कई सीरीज में अपना टैलेंट वे साबित कर चुके हैं। रोमू की माँ के रूप में अल्का अमीन बिंदास माँ की भूमिका निभाती दिखाई देती हैं। और आखिर तक आते-आते दिल जीत लेती हैं। वकील के किरदार में हितेन तेजवानी कुछ ज्यादा ही नाटकीय टाइप लगते हैं। कुल मिलाकर जेंडर सेंसिटाइजेशन पर भले ही आपको यह सीरीज हल्की लगे लेकिन अन्तिम एपिसोड में यह कहीं न कहीं संतुष्ट करती भी दिखाई देती है। हालांकि इसमें नारीवाद और नारी शरीर को लेकर लम्बा चौड़ा भाषण भी सुनने को मिलता है। मसलन अदालत में शिवानी जज के सामने सवाल रखती हैं कि- क्या औरत कोई बच्चा पैदा करने की मशीन है? या जो औरत बच्चा पैदा नहीं कर सकती, उसे शादी करने का कोई हक नहीं? क्या वह सिर्फ सेक्स सिम्बल है? जाहिर सी बात है नारी भी इंसान है।

लेखन व निर्देशन के मामले में बात करें तो शार्ट फिल्म ‘सोल साथी’ के बाद अबीर सेन गुप्ता की वेब सीरीज ‘पति पत्नी और पंगा’ के अलावा फिल्म ‘इंदू की जवानी’ भी प्रदर्शित हुई है। सुनने में आया है कि अबीर सेन गुप्ता ने दो साल पहले एक फिल्म ‘मैन टू मैन’ का निर्देशन किया था, जो अब तक सिनेमाघरों में नहीं पहुँच पायी। उसी को अब नाम बदलकर ‘पति पत्नी और पंगा’ नामक वेब सीरीज के रूप में ‘एमएक्सप्लेअर’ पर रिलीज किया गया है। इस सीरीज को देखते हुए एक बात दिमाग में जरूर आई जिसे अंत में जाते-जाते कहना जरूरी है और इस बारे में आप भी सोचिएगा कि माँ भी घर की नौकरानी के सामने अपने बेटे से सेक्स की बातें  करती दिखाई गयी है। क्या वास्तव में हम इतने आधुनिक हो गये हैं कि ऐसी बातें अब कर सकें?

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लेखक स्वतन्त्र आलोचक एवं फिल्म समीक्षक हैं। सम्पर्क +919166373652 tejaspoonia@gmail.com

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