उत्तरप्रदेश

न सुधरने वाले अफसरों पर योगी का एक्शन सख्त

 

यूपी के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ अफसरों के लचर रवैये को लेकर खासे नाराज हैं। शासन की नीतियों पर बोझ साबित हो रहे अफसरों को माफ करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। वे सख्त ऐक्शन में हैं। सात जुलाई को गोरखपुर मंडल के तीन जिलों कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज में काम काज की समीक्षा में एसडीएम समेत तीन अफसरों को कार्य में ढिलाई बरतने पर सख्त कार्रवाई की है। कुशीनगर के कलक्ट्रेट की बैठक में महराजगंज सदर के एसडीएम सत्यम मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटाने का फरमान दिया है। इसके अलावा कुशीनगर जिले के पडरौना व सेवरही में बिजली सप्लाई के मामले में लापरवाही पर अधिशासी अभियंता हंसराज कौशल और सेवरही के अधिशासी अभियंता एएच खान के विरूद्ध सख्त कार्रवाई का निर्देश वहाँ के जिलाधिकारी को दिया है। शासन की इस कार्रवाई से अफसरों में हड़कंप है।

पिछले एक पखवारे में हुई ज्यादातर समीक्षा बैठकों में अफसरों की लापरवाह कार्यशैली की सर्वाधिक चर्चा रही। सुस्त कार्यशैली को लेकर मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ अफसरों को बार बार आगाह करते और चेतावनी देते नजर आये। तल्ख तेवर में मुख्यमन्त्री ने कई बार दोहराया कि घूंसखोर, बदनामशुदा और लापरवाह अफसरों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ऐसे दागी अफसरों को जबरन रिटायर्डमेंट देकर उन्हें घर बैठाया जाये। शासन और जनता के बीच बोझ बन चुके लापरवाह अफसरों की लिस्ट बनाकर उनकी छंटनी की जाए। भ्रष्टाचार में लिप्त दागी अफसरों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की जल्द ही जांच कराके उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन और जनता दरबार में ऐसी शिकायतें ज्यादा आ रही हैं जिनको स्थानीय स्तर पर निपटाया जा सकता है, पर अफसरों में एक वर्ग ऐसा भी है, जो कायदे से कार्य करना ही नहीं चाहते। ऐसे में परेशान जनता को राजधानी का अनावश्यक चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ठीक ढंग से कार्य को अंजाम न दे पाने वाले अफसर घर बैठें। जिलाधिकारी कार्य योजना बनाकर कार्य को बढ़ावा दें और खुद निर्णय लेने की आदत भी डालें।

गजेन्द्र सिंह शेखावत

इसके पूर्व तीन जुलाई को केन्द्रीय जलशक्ति मन्त्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ समीक्षा बैठक में भी मुख्यमन्त्री योगी की नाराजगी साफ दिखी। वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये जिलाधिकारियों को चेतावनी दी कि जो अफसर कार्य को सही अंजाम नहीं दे रहे हैं, उनको फील्ड में रहने की जरूरत नहीं। आधा अधूरा काम करने वाले अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। घूंसखोर व भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों के विरूद्ध एफआईआर कराके उन्हें जेल भेजा जाये उनकी संपत्ति जब्त कर ईडी के सुपुर्द करें। सरकार के लिए गए फैसले के मुताबिक, 50 वर्ष से  अधिक उम्र, सुस्त व दागी अफसरों को अनिवार्य रिटायर्ड करने पर जोर है।

प्रदेश में चार सौ से अधिक दागी, सुस्त अफसर, कर्मचारियों पर अनिवार्य रिटायरमेंट की तलवार लटक रही है। इसमें गृह विभाग के लोग सबसे ज्यादा हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ को निलंबित व प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा सकती है। प्रतिकूल प्रविष्टि पाने वाले अफसर-कर्मचारियों को प्रोन्नति नहीं दी जाएगी। पिछले दो वर्षों में योगी सरकार ने सवा छह सौ से ज्यादा कर्मचारियों व अफसरों को चिन्हित किया। इसमें 201 कर्मचारी-अफसरों को जबरन रिटायर्ड कर दिया गया। मुख्यमन्त्री के निर्देश पर मुख्य सचिव डॉ. अनूप चन्द्र पाण्डेय ने नियुक्ति व कार्मिक विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी थी जिसमें पचास की उम्र पार कर चुके सुस्त, नकारा साबित होने वाले सभी विभागों के अफसर-कर्मचारियों का ब्यौरा हासिल कर उनको अनिवार्य सेवा निवृत्ति देने का निर्देश है। राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मन्त्री श्रीकांत शर्मा ने मीडिया से साफ तौर पर कहा कि भ्रष्टाचार पर सरकार की जीरो टालरेंस की नीति है। पिछले दिनों मुख्यमन्त्री की समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ जिलों और कार्यालयों में काम काज को लेकर जबरदस्त लापरवाही हो रही है, भ्रष्टाचार की भी शिकायतें लगातार आ रही हैं, जांच हो रही है, सख्त कार्रवाई करने को सरकार प्रतिबद्ध है। बहरहाल, सरकार के इस सख्त एक्शन से अफसरशाही में खलबली मची है।

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लेखक सबलोग के उत्तरप्रदेश ब्यूरोचीफ और भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रदेश महासचिव हैं| +918840338705, shivas_pandey@rediffmail.com

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