शख्सियत

कोरोना से उपजे अवसाद में रोशनी की किरण है माही की कहानी

 

ओलंपिक नज़दीक है और हमें ऐसी बहुत से कहानियाँ सुनने को मिलेंगी जिनमें खिलाड़ियों ने मुश्किल परिस्थितियों से निकल ओलंपिक तक का सफर तय किया। जज़्बा कुछ कर गुजरने का, जज़्बा खुद को साबित करने का। खेलों से हम बहुत कुछ सीखते हैं, खुद को खेल के मैदान में झोंक खिलाड़ी विपक्षी टीम के जबड़े से जीत छीन लाते हैं। करोड़ों लोगों के सामने खिलाड़ी अपनी हिम्मत और समर्पण से सभी का दिल जीत लेते हैं।

उदाहरण बहुत हैं, मिसाले बहुत हैं पर हम यहाँ बात करेंगे एक ऐसे खिलाड़ी की जिसने एक साधारण परिवार और छोटे से शहर में जन्म लेकर भी खुद को एक ऐसे मुक़ाम तक पहुँचाया जहाँ पहुँचना हर खिलाड़ी का सपना होता है। जिसके सन्यास लेने से पहले ही उसके जीवन पर एक हिन्दी फीचर फिल्म बन गयी। उसने एक बहुत बड़े देश की उम्मीदों का भार अपने कंधों पर ढोया और उस उम्मीद को अपने मुकाम तक पहुँचाया भी।

जी हाँ यहाँ बात हो रही है भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की। ये सच है कि क्रिकेट ओलंपिक में नही है पर भारतीयों के लिए हर क्रिकेट मैच किसी ओलंपिक के आयोजन से कम नही है। यहां शतकों का सैंकड़ा बनाने वाले सचिन को भगवान का दर्जा प्राप्त है पर सचिन के बाद भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा क्रिकेटर आया जिसके लिये कहा गया अनहोनी को होनी कर दे वो है धोनी।

1983 के वर्ल्ड कप की यादें अब हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के मस्तिष्क में धुंधली पड़ चुकी थी और नयी पीढ़ी ने उस जीत को सिर्फ किस्सों में ही सुना था। सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट को अकेले ही चमकती भारतीय अर्थव्यवस्था की तरह ही आगे ले जा रहे थे, भारत अब क्रिकेट की दुनिया का फिस्सडी देश नही रह गया था पर फिर भी एक कमी थी खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट में एकछत्र प्रभुत्व समाप्त करने की। भारत की 2001 में कोलकाता टेस्ट मैच की जीत इसका शंखनाद थी।

धोनी का भारतीय क्रिकेट में आगमन

वर्ष 2003 में हम ऑस्ट्रेलिया से वर्ल्ड कप के फाइनल में हारे। 2004 के अंत में धोनी भारतीय क्रिकेट टीम में आये और जल्द ही वर्ष 2007 में वेस्टइंडीज के निराशाजनक एकदिवसीय वर्ल्डकप के बाद इस टीम के कप्तान बना दिये गये। उसके बाद उन्होंने पूरे विश्व को भारत की युवा शक्ति दिखायी और भारत को वर्ष 2007 में पहली बार खेले जा रहे टी-20 विश्व कप का खिताब दिलाया। विकेट के आगे और पीछे धोनी की अद्भुत तेजी और तेज़ दिमाग के साथ ही 2009 में भारतीय क्रिकेट टीम उनकी कप्तानी में टेस्ट की नम्बर एक टीम बनी।

धोनी और चेन्नई सुपरकिंग्स

आईपीएल में धोनी चेन्नई सुपरकिंग्स का चेहरा बन गये। धोनी की कप्तानी में चेन्नई 3 बार आईपीएल का खिताब जीती। वर्ष 2010 में उत्तराखण्ड के देहरादून में साक्षी सिंह रावत के साथ महेंद्र सिंह धोनी शादी के बंधन में बंध गये।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धोनी की बादशाहत

भारत ने 2011 में एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप की मेजबानी की। सचिन का अंतिम वर्ल्ड कप होने के कारण शुरू से ही भारत पर इस वर्ल्ड कप को जीतने का दबाव था। पूरी भारतीय क्रिकेट टीम और हर एक भारतीय क्रिकेट प्रेमी सचिन के लिये विश्व कप जीतना चाहता था। पूरी सीरीज़ में युवराज का बेहतरीन खेल हो या श्रीलंका के खिलाफ मुंबई में खेले गये फ़ाइनल मैच के अंत में धोनी द्वारा मारा गया विजयी छक्का। उसके बाद सचिन का भारतीय खिलाड़ियों के कंधे पर बैठकर पूरे मैदान के चक्कर काटना यह हर एक दृश्य भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए अमर हो गये।

जून 2013 में इंग्लैंड को पांच रन से हरा धोनी ने भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का दूसरा खिताब दिलाया। इसके साथ ही धोनी विश्व के अकेले ऐसे कप्तान बन गये जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफियाँ जीती हों। 2014 में धोनी ने एक चौंकाने वाले फैसला लिया उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की कप्तानी छोड़ने के साथ ही टेस्ट क्रिकेट से सन्यास का फैसला लिया। क्रिकेट के चक्रव्यूह को भेदने का ज्ञान रखने वाले धोनी द्वारा यह निर्णय क्यों लिया गया शायद ही कभी देश को इस बारे में पता चल पाए।

2015 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप के ठीक पहले धोनी एक खूबसूरत बच्ची के पिता बने पर उन्होंने बच्ची को देखने के लिये भारत वापस आने से ज्यादा जरुरी देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझा और विश्व कप खत्म होने के बाद ही अपने परिवार से मिलने का फैसला लिया। भारत इस विश्व कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गया। जुलाई 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स पर अवैध सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के आरोपों को लेकर दो साल का बैन लगा दिया गया और धोनी आईपीएल में नई नवेली टीम पुणे सुपरजाइंट्स के साथ जुड़ गये जहां वह उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नही कर पाए।

2016 में महेन्द्र सिंह धोनी पर आयी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई जिसमें धोनी का किरदार दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने निभाया था।

2017 की शुरुआत में विराट कोहली भारतीय एकदिवसीय क्रिकेट टीम के भी कप्तान बना दिये गये। धोनी की कप्तानी पर कभी सवाल नही उठाया गया पर फिर भी भविष्य को देखते हुये विराट को कप्तानी देना एक सही फैसला लगा। कोहली भी धोनी के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने में लग गये। बुमराह, चहल, कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ियों को विकेट के पीछे से धोनी ने क्रिकेट के गुर सिखाए और उन्हें विपक्षी खिलाड़ियों का शिकार करना सिखाया।


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दो साल के बैन के बाद 2018 में जब आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की वापसी हुई तो धोनी ने राइजिंग पुणे  सुपरजाइंट्स के साथ अपने दो साल के निराशाजनक प्रदर्शन को भुलाकर चेन्नई को खिताब जिताकर यह साबित किया कि शेर अभी बूढ़ा नही हुआ है। 2019 के आईपीएल में भी उन्होंने अपनी टीम को फाइनल तक का सफ़र तय कराया।

कैप्टन कूल कहे जाने वाले धोनी का विवादों से भी नाता रहा। चेन्नई सुपरकिंग्स के बैन पर साधी गयी चुप्पी हो या वरिष्ठ खिलाड़ियों को टीम से बाहर निकालने को लेकर विवाद। पर धोनी हमेशा इन विवादों से मजबूती से बाहर निकल आए और मैदान पर अपने प्रदर्शन से आलोचकों की बोलती बंद करते गये

इंग्लैंड में खेले गये 2019 एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप में धोनी के प्रदर्शन को आलोचकों ने धीमा कहना शुरु कर दिया था। धोनी उन सभी को जवाब देंने के करीब भी आ गये थे पर सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहद दबाव की स्थिति में भी जडेजा के साथ मिलकर भारत को जीत के नज़दीक पहुँचाकर धोनी रन ऑउट हो गये। उस रनऑउट के दृश्य ने करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल तोड़ दिया था और भारत का विश्व कप में सफर वहीं समाप्त हो गया। विश्वकप के बाद से ही धोनी ने खुद को क्रिकेट से दूर रखा था।

वर्ष 2020 में कोरोना काल के बीच स्वतंत्रता दिवस की शाम करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को दिल तोड़ने वाली खबर मिली। महेंद्र सिंह धोनी और उनके साथी क्रिकेटर सुरेश रैना ने एक साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। धोनी ने इंस्टाग्राम पर ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ गाने के साथ वीडियो पोस्ट करते हुए अपने सन्यास का एलान किया।

 

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इसके बाद कोरोना की वज़ह से दुबई में हुए आईपीएल में धोनी और उनकी टीम का प्रदर्शन अच्छा नही रहा। इस साल भारत में हो रहे 14 वें आईपीएल संस्करण को कोरोना की वज़ह से बीच में ही रोक दिया गया है और उसे भारत के बाहर आयोजित कराने पर विचार चल रहा है।

पद्मभूषण, पद्मश्री, राजीव गांधी खेल रत्न अवार्डी, टेरिटोरियल ऑर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल( मानद उपाधि) और आईसीसी के कई पुरस्कार जीत चुके धोनी का पूरा ध्यान तो अभी सम्भवतः अपने आखिरी आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स को खिताब दिलाने पर होगा, अभी तक चेन्नई और धोनी इस आईपीएल में अच्छी स्थिति में दिख रहे हैं।

हम यह उम्मीद करते हैं कि क्रिकेट की गजब की समझ रखने वाले धोनी भविष्य में राहुल द्रविड़, सचिन गांगुली, कुंबले, लक्ष्मण की तरह भारतीय क्रिकेट को अपना बहुमूल्य योगदान देते रहेंगे और युवाओं के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे

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हिमांशु जोशी

लेखक उत्तराखण्ड से हैं और पत्रकारिता के शोध छात्र हैं। सम्पर्क +919720897941, himanshu28may@gmail.com
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