चर्चा में

 कोरोना कथा 

 

“एक समय की बात हैं पृथ्वी लोक में एक बार एक चीन नामक देश बहुत ही वैज्ञानिकता के आविष्कार में निपुण हो चला था, उसे अपने ज्ञान और धन पर अंहकार हो गया था। वह लोगों की अधिकतर जरूरतें पूरी कर सकता था इसलिए आस–पास के देश उससे मित्रता का भाव रखते थे किन्तु उसे अपनी वैज्ञानिकता पर इतना घमंड हुआ की उसने अपने मंत्री से कहा कि– अब हम स्वर्ग लोक पर अपना वैज्ञानिक आविष्कार करेंगें तुम जानें का प्रबन्ध करों।

मंत्री ने कहा हे;! राजन यह कलयुग हैं इस समय यह सम्भव नहीं होगा। तब राजा ने कहा मूर्खं हम वैज्ञानिकता में निपुण हैं स्वर्ग के देवता भी हमारे इस गुण से प्रसन्न होगे। तब मंत्री ने कहा हे! राजन सर्वप्रथम आप अन्य देशों पर परीक्षण कर लें फिर जो उचित जान पड़े वह करें। राजा ने कहा उचित हैं। तब राजा ने अपने विज्ञान ज्ञान से एक कोरोना नामक राक्षस को विश्व के भिन्न– भिन्न देशों में भेज दिया। देखते ही देखते पूरा विश्व लगभग उसके चपेट में आ गया। अपने–अपने देश के सभी राजा कोरोंना नामक राक्षस से लड़ रहे थे किन्तु भारत नामक देश के राजा ने उस कोरोंना नामक राक्षस का आदर,सत्कार किया, पूजा-अर्चना की, जो उस राक्षस को पसंद था वह वहीं किया। इससे उस राक्षस की शक्ति क्षीण होने लगी।King of china, प्रेरणास्त्रोत : चीन का राजा ...

किन्तु चीन के राजा को जब पता चला कि भारत नामक देश में कोरोंना राक्षस की शक्ति क्षीण हो रही हैं तो वह परेशान हो उठा ..1400 सैनिकों को भेजा किन्तु! भारत में आने के बाद सभी बन्धक बन गए। भारत नामक देश को छोड़ कर कोरोंना राक्षस अपना विकराल रुप लें लिया था।

किन्तु भारत में वह शक्ति क्षीण होने के कारण अपनी आसुरी प्रवृति को समेटने की कोशिश कर रहा था। भारत देश के राजा भी बड़े ही दयालु थे उसे किसी तरह की हानि नहीं पहुंचा रहें थे। तब कोरोंना राक्षस राजा से कहने लगा हे! राजन आपने जिस तरह मेरा सादर सत्कार किया, घंटा, ताली, थाली की ध्वनि से, सभी घरों में रह कर मेरा मार्ग स्वच्छ किया, दीपों से आरती किया। हम आपकी इस भक्ति भाव से प्रसन्न हैं आपकी आधीनता स्वीकार करते हैं अब वर मांगें : तब राजा ने कहा हें! दानव आप हमारा देश छोड़ कर अन्य देशों में या हमारे ही देश में रेगिस्तान की भूमि पर निवास करें । और यहाॅ किसी वर का क्या काम ।

तब राक्षस ने कहा ! तथास्तु .. और अपने देश की ओर प्रस्थान किया। यह अतिथि सत्कार भारत देश के राजा ने 21 दिनों तक किया स्वयं एवम् अपनी प्रजा से भी करवाया अतः यह कथा जो भी प्रेम भाव से श्रद्धा पूर्वक पढ़ता व सुनता हैं उसे कोरोंना नामक राक्षस कभी छू भी नहीं सकेगा।
इस कथा का वाचन किसी भी दिन ,किसी भी समय किया जा सकता हैं पर ध्यान रहें आपकी भक्ति मानव सेवा एवम् देश प्रेम की हो ।।
इति श्री
बोलो भारत माता की जय
वन्दे मातरम्।।

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लेखिका अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा, मध्य प्रदेश में शोध छात्रा हैं। सम्पर्क +919415606173, [email protected]

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