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फेंकू पर पप्पू भारी

                

  • सुरेन्द्र कुमार

पांच राज्यों में चुनाव के नतीजे भारतीय राजनीति में जनता केंद्रित मुद्दों की वापसी का आगाज़ है, साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस पार्टी व राहुल गांधी के नेतृत्व को स्पष्ट स्वीकार्यता दी गई है। भाजपा  में लोक विरोधी नीतियों एवम संगठन स्तर पर केंद्रीकरण के बढ़ने के चलते आंतरिक लोकतंत्र पर प्रहार हुआ है जिसका परिणाम 5 राज्यों के चुनावों में देखा जा सकता है। भाजपा  0-5 पर खड़ी नज़र आ रही है चुनाव के नतीजे सरकार की नीतियों पर जनता का जवाब होता है। सरकार ने जो कार्य किये हैं या जो संविधान विरोधी कार्य किये और कार्य करना चाहती है उसे जनता ने खारिज कर दिया है। साथ ही कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में जो व्यवहारिक, संविधान के अनुसार जनता के अधिकारों की रक्षा व सम्मान करते हैं, उसे स्वीकार किया है। भारतीय राजनीति में जनता केंद्रित और व्यवहारिक नज़रिया फिर स्थापित हुआ एवम जनता को धोखा देने वाले को खारिज किया गया है, गैर जिम्मेदार राजनीति जिसमें हिंसा की संस्कृति थोपी जा रही थी उसे भी जन मानस ने पूरी तरह से खारिज किया है।

इन चुनावों का आकलन वर्तमान व भविष्य दोनों को देखते हुए करना उचित होगा क्योंकि यह चुनाव 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महत्व रखता है। केंद्र में स्पष्ट बहुमत की सरकार है और राजस्थान में भी भाजपा  की सरकार थी। यह परिणाम राजस्थान तक सीमित नहीं किया जा सकता भाजपा  केंद्र व राज्य में जो कर रही थी उसके खिलाफ जनता ने कड़ा संदेश दिया है, नोटबन्दी, बेरोजगारी, किसानों की बुरी दशा का जनता ने जवाब दिया है। भाजपा  की एक विशेष छवि जिसमें हिंसा है यह हिंसा की संस्कृति उनकी कार्यशैली व भाषा में दिख रही है, भाजपा  को विकास के मुद्दे पर बहुमत मिला था और  यह मूलभूत मुद्दा ही चुनाव में  खो गया। इसके विपरीत कांग्रेस ने रोजगार, किसानों की कर्ज़ माफ़ी, कल्याणकारी योजना व मिलीजुली संस्कृति को बचाने की बात की। यह चुनाव दो विचारधाराओं के बीच चला है इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि जिस तरह कांग्रेस को बहुमत मिला है वह यह दर्शाता है कि जनता कांग्रेस की नीतियों को बढ़ चढ़कर स्वीकारती हैं। देश चरमपंथ की राह पर नहीं चल सकता गंगा जमुनी संस्कृति व आपसी भाईचारे में वोटर को भरोसा है यह एकता ही देश को विकास के पहिये से जोड़ सकती हैं यह सूत्र अब जनता समझ रही हैं। भाजपा  भारतीय जन मानस का सही आकलन नहीं कर पाई जिसके चलते वह  बहुमत से दूर हो  गई है।
जिस ब्रांड इमेज के साथ भाजपा  आई थी उसमें विकास तो हुआ नहीं बल्कि दलितों अल्पसंख्यकों पर प्रहार ही हुआ। कांग्रेस ने सकारात्मक व व्यावहारिक राजनीति की है जबकि भाजपा  की झूठ की राजनीति  ’15 लाख हर खाते में आएंगे’ खत्म हुई। देश की जनता ज़िम्मेदार नेतृत्व चाहती हैं जो उनके जीवन को सही मायनों में विकास से जोड़ सके, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और किसानी भारत के सर्वांगीण  विकास व आत्मनिर्भरता से जुड़े हुए मुद्दे हैं जिसे कांग्रेस लेकर चल रही है। देश की जनता ज़िम्मेदार नेतृत्व के रूप में कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी को देख रही है। राहुल गांधी ने इंसान और इंसानियत की बात की, यह चुनाव मानवता की जीत का चुनाव रहा।

डॉ सुरेंद्र कुमार डूटा कार्यकारिणी के सदस्य और आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के रिसर्च विभाग के दिल्ली समन्वयक हैं। 9013463158

 

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