शतरंज के खिलाड़ी
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सिनेमा
सत्यजित राय का सिनेमा ‘शतरंज के खिलाड़ी’: कटार, तलवार, तमंचे और शतरंज के मोहरे
सत्यजित राय (2 मई 1921- 23 अप्रैल 1992) की जन्मशताब्दी वर्ष पर विशेष ‘राय का सिनेमा न देखना इस जगत में सूर्य या चन्द्रमा को देखे बिना रहने के समान है।’ – अकिरा कुरोसावा सत्यजित राय (2 मई 1921- 23 अप्रैल 1992) ने हिन्दी में दो…
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सिनेमा
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’
आप सह्रदय समाज से हैं इसलिए मैं निश्चिन्त होकर मान ले रहीं हूँ कि ‘शतरंज के खिलाड़ी’ कहानी से आप परिचित होंगे ही, जिसमें वे नवाबी शौक में डूबे और जनता को ‘डुबाते’ सामंती, जागीरदारों के ‘शतरंज की दलदल’…
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सिनेमा
शतरंज के खिलाड़ी : सत्यजीत राय
अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह (शासन1847-1856) इतिहास के उन पात्रों में हैं जिनकी ‘प्रचलित’ छवि उनके व्यक्तित्व के कई आयामों को छुपा देती है। शाह की ‘छवि’ सामान्यतः नवाबी रंग में डूबे, लोक कल्याण से विमुख, अय्याश…
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देशकाल
शतरंज के खिलाड़ी: कहानी बनाम सिनेमा
इधर ‘शतरंज के खिलाड़ी’ को दोबारा देखने के मौका निकल आया। और इस बार देखते हुए इस बात का भान हुआ कि कहानी भले प्रेमचंद की रही हो, लेकिन सिनेमा के धरातल पर वह प्रेमचंद से ज्यादा सत्यजित राय…
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