जयप्रकाश नारायण
-
आवरण कथा
लोहिया होते तो राजनीति इतनी क्षुद्र न होती
बीती सदी के अस्सी के दशक में कभी तब की मशहूर पत्रिका ‘रविवार’ ने डॉ. राममनोहर लोहिया पर एक विशेषांक निकाला था। विशेषांक में एक लेख जाने-माने पत्रकार राजकिशोर का भी था। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में…
Read More » -
शख्सियत
सम्पूर्ण क्रान्ति के शिल्पी : लोकनायक जयप्रकाश नारायण
आजाद भारत के असली सितारे – 12 सक्रिय राजनीति से डेढ़ दशक तक दूर रहने के बाद 1974 में “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” के नारे के साथ जब मैदान में उतरे तो सारा देश जिनके…
Read More » -
एतिहासिक
स्वामी सहजानन्द सरस्वती : सन्यास से समाजवादी तक का सफर
पटना से 30 कि.मी पश्चिम बिहटा आजकल इन्डस्ट्रियल हब के रूप में परिणत होता जा रहा है। बिहटा के दक्षिण सड़क किनारे ही स्वामी सहजानन्द सरस्वती का ‘सीताराम आश्रम’ स्थित है। यहीं से उन्होंने देश भर के किसान आन्दोलन…
Read More » -
एतिहासिक
दास्तान-ए-दंगल सिंह (41) – पवन कुमार सिंह
पवन कुमार सिंह आपातकाल की समाप्ति के बाद 1977 का आमचुनाव एक बड़े उत्सव की तरह था। 18 जनवरी 1977 को अचानक इमरजेंसी वापस लेकर और आमचुनाव की घोषणा करके इंदिरा जी ने हर खासोआम को चौंका दिया…
Read More » -
आवरण कथा
दलीय लोकतन्त्र, चुनाव और जेपी
साल 1974 के बिहार जनआन्दोलन के क्रान्तिधर्मी एक नारा यह भी लगाते थे-‘तुम जनप्रतिनिधि नहीं रहे हमारे, कुर्सी गद्दी छोड़ दो’। यह नारा आजाद भारत के लोकतान्त्रिक ढांचे के क्षय होने की गहरी और मार्मिक अभिव्यक्ति थी। आखिर क्यों…
Read More » -
राजनीति
कम्युनिस्टों और समाजवादियों की भारी भूलें
बीसवीं शताब्दी के बीस के दशक के आरंभिक दौर में, कई प्रमुख समाजवादी ग्रुप सक्रिय थे, जिन्होंने आज़ाद भारत को समानता और स्वतन्त्रता पर आधारित एक समाजवादी देश बनाने का काम किया था। भारतीय समाजवादी आन्दोलन के पिछले सौ…
Read More » -
बिहार
जमींदारों की रणनीति है ‘भूमिहार’ पहचान पर जोर देना
(भाग 2) एक श्रेणी के बतौर ‘भूमिहारवाद’ या भूमिहार विरोध बिहार में स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद से ही प्रचलन में रहा है। जब आजादी के बाद श्रीकृष्ण सिंह बिहार के पहले मुख्यमन्त्री बने, उनके कार्यकाल को भी ‘‘भूमिहार…
Read More » -
दास्तान-ए-दंगल सिंह (38)
पवन कुमार सिंह 8 अप्रैल 1975 को कुर्सेला के साथियों ने सत्याग्रह से जेपी को लाचार करके ऐतिहासिक सभा की थी। पर उन्हें सुनने के लिए जुटी अपार भीड़ को देखकर वे खुश हो गए थे। वापसी में मैं उनके…
Read More »





