उत्तरप्रदेशमुद्दा

परम्परागत रोजगार पर संकट

 

  •    सुरेश राठौर

 

बनारस में नाविकों का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना यह शहर, इसकी सभ्यता, यहाँ विराजमान काशी विश्वनाथ और यहाँ की जीवन रेखा माँ गंगा। ये नाविक हजारों सालों से बनारस के घाटों पर रहते आए हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी गंगा पर नाव चलाकर अपना जीविकोपार्जन करते रहे हैं। इनकी आजीविका का आधार माँ गंगा ही है।

पर जब से देश में अन्तर्देशीय जलमार्ग विकास की योजना बनी और इसे मूर्त रूप देने के लिए गम्भीर प्रयास शुरू हुए, तब से इनके रोजगार पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। सरकार ने अर्न्तदेशीय जलमार्ग के विकास के लिए हल्दिया से इलाहाबाद के बीच गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली के 1620 किमी लम्बे हिस्से को राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक घोषित किया है। इस जलमार्ग को व्यापारिक उद्देश्य से सुगम बनाने के लिए आधारभूत  सुविधाओं को विकसित करने की कवायद तेज हो गई है और वाराणसी को इस जलमार्ग का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बनाया जा रहा है। तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हो जाने के बाद इस जलमार्ग पर बड़े आकार के जलयानों की आवाजाही होगी ओर बड़े पैमाने पर माल परिवहन सम्भव होगा। साथ ही पर्यटन के उद्देश्य से भी कई नदी क्रुज चलेंगे। इस जलमार्ग पर भविष्य में लाखों टन कोयला, अनाज, उर्वरक वगैरह ढुलाई की योजना है।

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बनारस के घाटों पर रहने वाले 40 हजार नाविकों की रोजी-रोटी पर पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा में जल परिवहन के कारण संकट के बादल छा गए हैं। पहले से ही बढ़ती बेरोजगारी की परेशानी झेल रहे बनारस के नाविक समाज के नाव चलाने, रेत निकालने, गंगा किनारे खेती करने, मछली मारने जैसे परम्परागत रोजगार को रिवर फ्रन्ट बनाने और गंगा में क्रुज चलाने के लिए खत्म किया जा रहा है। इसी वजह से नाविकों के वोट लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है।

जैसे-तैसे ही सही पर नाव चलाने से आत्मनिर्भर नाविक समाज अब तक ससम्मान रोजी-रोटी कमाकर जीवन बसर कर रहा था, पर अपना रोजगार छिनता देख उसमें खासी नाराजगी है। अपने रोजगार और परिवार पर आए संकट की जानकारी एवं इसे बचाने के लिए अपना माँगपत्र नाविक समाज ने शासन-प्रशासन और बनारस के सांसद सह देश के प्रधानमंत्री को भी भेजा, पर उनकी तरफ़ से आश्वासन मिलना तो दूर, उनके पत्र का कोई जवाब भी उनको नहीं मिला। इसके बाद नाविक समाज नाव संचालन बंद कर अपना विरोध भी जता चुका है। 

अपनी मांगों को शासन-प्रशासन द्वारा कोई तवज्जो न मिलने से नाविकों की महापंचायत में कोई और रास्ता न देखकर हड़ताल करने का रास्ता चुना है और विगत 28 दिसम्बर 2018 से नाव चलाना बंद करके नाविक अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं और अपनी माँगों की सुनवाई होने का इंतजार कर रहे हैं।

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बनारस का नाविक समाज न सिर्फ अपनी रोजगार बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, बल्कि वह गंगा की सफाई को लेकर भी चिन्तित है और उसमें हर तरह से सहयोग के लिए तत्पर है। वह बनारस के विकास का समर्थक है और इस प्रक्रिया के साथ जुड़ा रहना चाहता है, पर वह यह चाहता है कि विकास की प्रक्रिया समावेशी हो, उनके हितों का भी इसमें ध्यान रखा जाए। वह गंगा की पारम्परिक और साँस्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए संकिल्पत है। वह हजारों नाविकों को रोजगार से वंचित कर उनके परिवार को अनिश्चितता की अँधेरी राह पर धकेल कर बड़े कार्पोरेट घरानों द्वारा बड़े क्रुज चलाकर मुनाफा कमाने की इस कवायद को स्वीकार करने के लिए कतई तैयार नहीं और उसकी माँगे नहीं मानी गई तो वह पूरे भारत के नाविक समाज को संगठित कर इसका मजबूती से प्रतिकार करने की तैयारी में हैं।

नाविक समाज की निम्नलिखित प्रमुख माँगों को एनएपीएम द्वारा प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी, जल परिवहन तथा जल संसाधन मन्त्री (भारत सरकार) श्री नितिन गडकरी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित किया गया है, और उनसे सकारात्मक पहल का इंतजार है:-

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1- गंगा में क्रुज संचालन बन्द हो।

2- नावों के लाइसेंसों का पुराने नियम के साथ नवीकरण हो।

3- गोताखोरों की नियुक्ति जल पुलिस में स्थायी रूप से हो।

4- काशी में गंगा पर वाटर-स्पोर्ट्स बंद हों।

5- घाटों/तालाबों पर सरकार/कम्पनी का अवैध कब्जा बंद हो और इसे हटाया जाए।

6- विलुप्त डॉलफिन एवं अन्य मछलियों के संरक्षण के लिए गंगा में बड़े जहाजों के संचालन की योजना रद्द हो।

7- गंगा, वरुणा एवं अस्सी में मिल रहे सैकड़ों नालों, सीवरों को बंद किया जाए।

8- प्राइवेट कम्पनियों या बाहर के व्यापारियों द्वारा नाव लाकर की जा रही नाविक समाज की जीविका की समाप्ति रोकी जाए।

9- गंगा के निर्मलीकरण के नाम पर आबंटित बजट की लूट बंद हो, इस काम का क्रियान्वयन समयबद्धता के साथ पूरा हो और गंगा सफाई वाटर वेज के नाम पर सरकार सही तथ्य सामने लाए।

10- मल्लाह समाज को गंगा किनारे खेती और वन क्षेत्र के विकास हेतू पट्टे आवंटित किए जाएँ।

लेखक मजदूर यूनियन वाराणसी तथा एनएपीएम उत्तर प्रदेश के संयोजक हैं|

सम्पर्क- +919839017693, s.rathaur786@gmail.com

 

 

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी
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