gandhi
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शख्सियत
आज गांधी के बाद लोहिया ही सबसे ज्यादा प्रासंगिक है
महापुरूषों की स्मृति और मूल्यांकन से ही कोई समाज ऊर्जा ग्रहण कर निखर सकता है। गांधी जी के बाद डॉक्टर राममनोहर लोहिया ही सबसे प्रखर विचारक-चिंतक रहे हैं। अपनी धरती-मिट्टी, उसकी सुगंध से जुड़े हुए है। छिटपुट लेखन-भाषण, सभा-गोष्ठियों…
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पुस्तक-समीक्षा
उसने गाँधी को क्यों मारा
गाँधी एक ऐसा शब्द है जिसे हमने बचपन से सुना, आज भी गाँधी के ऊपर सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट चिपका दो तो पक्ष-विपक्ष वाले उन पर अपनी राय देने के लिए तैयार रहते हैं। महात्मा की हत्या करने…
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एतिहासिक
आर्थिक समानता के लिये गाँधी की ट्रस्टीशिप
गाँधी के शब्दों में मै स्वराज हासिल करने के लिये प्रयासरत हूँ। उन जी-तोड़ मेहनत करने वाले और बेरोजगार लाखों करोड़ों लोगों के लिये, जिन्हे दिन में एकबार भी भरपेट खाना नसीब नही होता और बासी रोटी के एक…
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एतिहासिक
7 जून, 1893 का वो दिन
राजीव कार्तिकेय 7 जून, 1893 का वो दिन जिसने तय किया कि दुनिया का इतिहास और भूगोल कोई भी बदल सकता है! बगावती एहसास का वह ठंडा क्रांतिकारी मुसाफिर जो अपनी जिन्दगी की खामोशियों को ज्यादा से ज्यादा…
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चर्चा में
शाहीनबाग, जाफराबाद और गाँधी
मैं 1970 में दिल्ली आया। पचास वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है कि केन्द्र की सत्ताधारी सरकार के सीधे नियंत्रण में दिल्ली को हिंसा और तबाही के रास्ते पर ठेला जा रहा है। यह तटस्थ रहने का…
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चर्चा में
हे ईश्वर, इन्हें माफ करना ! – कुमार प्रशांत
मुझे यह जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है कि अलीगढ़ में अखिल भारत हिंदू महासभा के जिन लोगों ने 30 जनवरी 2019 को महात्मा गांधी को सामने खड़ा कर, फिर से गोली मारने का कुत्सित खेल खेला, वे कौन…
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