हस्तक्षेप

समाप्त होते खेल के मैदान

 

“कहता है बचपन हमें यूं ही खेलने दो,
खेलकूद कर देश सेवा योग्य बनने दो,
हक है हमारा खेल के मैदान पाने का,
सरकार तुम उन्हें यूं गायब ना होने दो।।”

बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेल और खेल के मैदानों के महत्व को लेकर बहुत लम्बे समय से हमेशा बात की जाती है और उस पर अमल भी किया जाता रहा है। लेकिन अफसोस आज खेल के मैदान पर बात केवल एक बिंदु मात्र बनकर सीमित होकर रह गयी है, उस पर कागजों से निकल कर धरातल पर कभी अमल नहीं किया जाता। देश में अव्यवस्थित विकास की अंधी दौड़ सरकारी संस्थाओं व बिल्डरों के अधिक धन कमाने के लालच ने बचपन को भी खेलने से रोकने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया है। देश में जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों से शहरों, कस्बों व गांवों से खेल के मैदान बहुत तेजी से गायब होते जा रहे हैं, वह के हालात हमारे बच्चों के साथ-साथ हम सभी लोगों को चिंतित करने वाले है।

क्योंकि हमारे बच्चों के सर्वांगीण विकास व पूर्ण शारिरिक विकास के लिए जीवन में खेलकूद बहुत आवश्यक है, घर से बाहर जाकर मैदान में खेलने से बच्चे की संचित ऊर्जा का सदुपयोग होता है और शारिरिक लाभ के साथ बच्चों को अच्छा समय बिताने की अनुमति देता है, बच्चों को आपस में सम्बन्ध विकसित करने की कला को सिखाता है, खेल बच्चों के व्यक्तित्व के विकास में योगदान करते हैं, बच्चों की कल्पना शक्ति को विकसित करते हैं और उन्हें दुनियादारी का सामना करना सिखाते हैं, खेल से ही बच्चों में शारिरिक बल के साथ-साथ आत्मबल भी बढाता है, खेल ही प्रत्येक बच्चे को हार कर फिर से जीतने के लिए प्रेरित करता है और जीतकर भी जीवन में अहंकार का भाव ना आने देना सिखाता है, खेल से ही बच्चों के अंदर चपलता, समन्वय और संतुलन जैसे जीवन के लिए बेहद आवश्यक कौशल विकसित होते हैं। वैसे भी बिना खेले-कूदे आने वाले समय में हमारे बच्चे अपना बचपन कहाँ जियेंगे, किस प्रकार जियेंगे क्या हम लोगों ने व हमारे देश के सर्वोच्च ताकतवर नीतिनिर्माताओं ने कभी यह सोचा है?

क्या हमारे सिस्टम में बैठे लोगों ने यह सोचा है कि सरकार का दायित्व बनता है कि वो बच्चों को खेलने की जगह निशुल्क व सुलभता से हर शहर कस्बे व गाँव में आवश्यक रूप से उपलब्ध करवायें। आज खेल के मैदानों के अभाव में हमारे अपने प्यारे छोटे-बड़े बच्चे आखिरकार खेलकूद करके अपनी धमाचौकड़ी किस जगह पर मचायेंगे, क्या हमारे देश के आम लोगों, ताकतवर सिस्टम व नीति-निर्माताओं ने इस पर कभी गहनता पूर्वक विचार किया है? आज जिस तरह से गली-मोहल्ले के छोटे-बड़े पार्कों व खेल के मैदानों पर भू-माफियाओं, बिल्डरों व खुद सरकार ने खुद के बनाए हुए नियम-कायदों को ताक पर रखकर कब्जा जमाने के लिए गिद्ध दृष्टि लगायी हुई है, वह हमारे बच्चों के खुशहाल बचपन के लिए उचित नहीं है। आज हमारे देश के शहरों के अधिकांश सेक्टरों में यह स्थिति हो गयी है कि जब से खुले मैदान की जगह सोन्दर्यकरण होकर वहाँ पर सुंदर पार्कों का निर्माण हुआ है, तब से ही सम्बन्धित नगर पालिका, नगर निगम व आरडब्ल्यूए की पार्कों में खेलने पर रोक की वजह से बच्चों के खेल बंद हो गये हैं। कोरोना महामारी के बाद सुकून भरा सीन….स्कूल के खेल मैदान बच्चों से गुलजार – Rajasthan Patrika News

आज देश के अधिकांश स्कूलों में खेल के मैदानों के नाम पर मान्यता लेने के लिए केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है, जहाँ खेल के मैदान हैं उनमें स्कूल के वाहनों की पार्किंग बन गयी है वहाँ पर बच्चों के खेलने की जगह हर समय स्कूल बसें व अन्य वाहन अपना कब्जा जामकर रखते हैं। आज खेल के मैदानों के अभाव में हमारे देश के भविष्य बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी योगा, एक्सरसाइज, कब्बडी, कुश्ती, फुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, टेनिस, दौड़, बेडमिंटन, स्केटिंग, गिल्ली डंडा, खो-खो, हैंडबॉल, वालीबॉल, आदि सभी तरह के अधिकांश आउटडोर खेल धीरे-धीरे बंद हो गये हैं। आज हमारी कॉलोनियों के पार्कों पर नियन्त्रण करने वाली संस्थाओं ने अधिकांश पार्क के बाहर बड़े-बड़े शब्दों में नोटिस बोर्ड पर लिखवा रखा है कि यहाँ पर किसी तरह का खेल खेलने की सख्त मनाही है, इस स्थिति में बच्चे करे तो आखिर क्या करें, अगर कोई बच्चा गलती से किसी पार्क में खेलने की कभी गुस्ताखी कर देता हैं, तो उसको पार्क के रखरखाव करने वाले कर्मचारी, आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी और आसपास के निवासी तत्काल रोक देते हैं, जिसको लेकर के कई बार तो नासमझी के चलते बच्चों के अभिभावकों के साथ इन लोगों की लड़ाई तक भी हो जाती है, जो कि कभी-कभी तो बहुत गंभीर रूप भी ले लेती है। नन्हे बच्चे इस तरह की स्थिति देखकर बेहद तनावग्रस्त हो जाते हैं।

देश में खेल के मैदानों की तेजी से होती कमी हमारे बच्चों के शारिरिक व सर्वांगीण विकास के नजरिए से बहुत चिंताजनक स्थिति है। इस गंभीर हालात को देखकर आज गायब होते खेल के मैदानों पर कहता है हमारे देश का प्यारा बचपन हमें अपना जीवन खेलकूद कर जीने दो, घर से बाहर निकल कर कहीं तो खेलने तो दो, धन कमाने के लालच में सिस्टम में बैठे लोगों हमारे खेल के मैदानों को तो कम से कम बख्श दो!

आज प्रत्येक माता-पिता व अभिभावकों के लिए सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि रोजाना की चिकचिक व गायब होते खेल के मैदानों के चक्कर में बहुत सारे बच्चों ने तो घर से बाहर निकल कर बिल्कुल खेलना छोड़कर पूरे दिन मोबाइल या इनडोर खेलों पर लगकर फ्लैटों में बंद रहना शुरू कर दिया है, जिसके चलते देश के बच्चे तेजी से बहुत सारी गंभीर बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं, इसकी वजह से बच्चे तेजी से मोटापे के शिकार होते जा रहे हैं, मोटापा बच्चों के बचपन को लीलने का काम कर रहा है, डॉक्टरों व विशेषज्ञों के अनुसार पूरे-पूरे दिन फ्लैटों में बंद रहने के कारण बच्चों के शारिरिक व मानसिक विकास पर बहुत तेजी से नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, इस हालात की वजह से कम उम्र में ही बच्चे बेहद गंभीर बीमारियों की वजह से अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता को तेजी से खोते जा रहे हैं।

घरों में बंद रहकर इंटरनेट व मोबाइल के उपयोग करने के चलते आज बच्चे अपने बचपन को भूलकर समय से पहले बड़े होते जा रहे है, जो स्थिति हमारे बच्चों के नजरिये से व समाज के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। आजकल बच्चों ने खेल के मैदान के अभाव में बहुत तेजी से आउटडोर खेलों को अलविदा करके शारिरिक श्रम करना बंद कर दिया है, जिसके चलते वो शारिरिक श्रम का कार्य करने में अक्षम साबित हो रहे हैं और शारिरिक रूप से बहुत अधिक कमजोर होते जा रहे हैं। बच्चों ने खेल के मैदान के अभाव में मजबूरी के चलते बहुत तेजी से इनडोर खेलों को चुनना शुरू कर दिया, खेल के मैदान की कमी व आयेदिन होने वाले लड़ाई-झगड़ों के चलते आजकल हमारे बहुत सारे बच्चों व युवाओं ने तो आउटडोर खेलों से पूर्ण रूप से किनारा तक कर लिया है। आज हमारे देश के बच्चे खुले मैदानों पर अपने बचपन के मनपसन्द खेलों को खेलने के लिए तरस रहे हैं। धूप में खेलकूद ना करने के चलते डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में विटामिन डी की कमी बहुत कम उम्र में ही होती जा रही है, जिसके चलते वो कच्ची उम्र में ही गंभीर बिमारियों के शिकार बन रहे हैं।

देश में बहुत तेजी से बढ़ती आबादी और सेक्टरों में स्थित पार्कों के सौन्दर्यीकरण व डेवलपमेंट के चलते धीरे-धीरे पूरे शहर से खेल के मैदान गायब होते जा रहे हैं।  आजकल हालत यह हो गये है कि देश की राजधानी दिल्ली के पास स्थित उत्तर प्रदेश के बड़े शहर गाजियाबाद की उदाहरणार्थ अगर मैं बात करूं तो यहाँ की बड़ी कॉलोनियों इंद्रापुरम, राजनगर, कविनगर, शास्त्री नगर, पटेल नगर, राजेन्द्र नगर, गोविंदपुरम आदि को विकसित करने वाले ‘गाजियाबाद विकास प्राधिकरण’ ने इन में कोई भी निशुल्क छोटा-बड़ा खेल का मैदान नहीं छोड़ा है,  इन कॉलोनियों में छोटे-बड़े पार्क तो है लेकिन उनमें से अधिकांश में खेल खेलना मना है, नेहरू नगर में एक क्रिकेट स्टेडियम है जिसको पहले तो प्राधिकरण खुद चलाता था अब वो भी एक निजी बिल्डर को चलाने के लिए दे दिया गया है, जहाँ पर पहले से ही फीस वसूली जाती है। आवास विकास परिषद की अयोध्या योजना में फंसा पेच - Screw stuck in Ayodhya scheme of Housing Development Council

यही स्थिति ‘उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद’ के द्वारा विकसित कॉलोनी वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार आदि योजनाओं की है, हद तो वसुंधरा में हो गयी है जहाँ पर सेक्टर सात व आठ को जन सुविधाओं के लिए विकसित किया जाना था जिसमें स्टेडियम भी था, लेकिन अब परिषद ने धन कमाने के लालच में नक्शे के विपरीत जाकर के मास्टर पालन में उसका भू उपयोग व्यवसायिक में परिवर्तन करवा लिया है, पूरी वसुंधरा को इन सेक्टरों में जन सुविधा दिखाकर बेचने के बाद ‘आवास विकास परिषद’ ने भू उपयोग बदलवा कर कॉलोनी के स्थानीय निवासियों विशेषकर बच्चों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है, अगर इस कार्य को देश का कोई भी निजी बिल्डर अंजाम दे देता तो वह इस तरह के फर्जीवाड़ा करने के मामले में जेल अवश्य जाता, लेकिन उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने एक निजी बिल्डर को भी पीछे छोड़ते हुए धन कमाने के लालच में खुद ही लोगों से छल करने का कार्य किया है।

जिस तरह से वसुंधरा में स्टेडियम को समाप्त कर दिया गया, उसी तरह से देश के विभिन्न शहरों में धीरे-धीरे खेल के मैदानों को निजी व सरकारी तन्त्र बहुत तेजी से आयेदिन लील रहा है, निजी वैध या अवैध कॉलोनी में तो खेल के मैदान बहुत दूर की बात है वहाँ तो पार्क ही बन जाये तो ही बहुत बड़ी बात है, गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी इसका उदाहरण है। खेल के गायब होते मैदानों पर मेरी देश के सर्वोच्च नीति-निर्माताओं से गुजारिश है कि वो हमारे देश के भविष्य को स्वस्थ बनाये रखने के लिए व अवसाद मुक्त रखने के लिए देश से तेजी से गायब होते खेल के मैदानों को राज्य सरकारों के सामजंस्य से सुरक्षित करने का कार्य करें और प्रत्येक शहर कस्बे व गाँव में खेलने के लिए नये स्थानों को चिन्हित करवा कर, हमारे देश के बच्चों को खेलने के लिए आवश्यक रूप से जगह उपलब्ध करवाएं और उनको स्वस्थ बनाकर देश के भविष्य को उज्जवल बनाएं।

।। जय हिन्द जय भारत ।।

।। मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान ।।

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लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। सम्पर्क +919999379962, deepaklawguy@gmail.com

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