जय प्रकाश
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May- 2022 -19 Mayयत्र-तत्र
डिजिटल युग में कविता
बीसवीं शताब्दी तक आकर मानव-सभ्यता जिस मुकाम पर पहुँची, वहाँ अभिव्यक्ति के दो माध्यम पूरी तरह विकसित हो चुके थे– वाचिक माध्यम और मुद्रित माध्यम। वाचिक या उच्चरित शब्द सदियों पहले से श्रुति-परंपरा के रूप में मौजूद था। फिर…
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Apr- 2022 -10 Aprilयत्र-तत्र
कवि की कहानी
तीन दशक से भी ज़्यादा समय हुआ है जब ‘पूर्वग्रह’ में प्रकाशित एक बातचीत में डॉ. नामवर सिंह का ध्यान उन कहानीकारों की ओर आकृष्ट किया गया जो मूलतः कवि हैं, उनकी ख्याति भी मुख्यतः कवि के रूप में…
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