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वसुधैव कुटुम्बकम: वैश्विक समृद्धि में भारत की भूमिका 

 

1 दिसंबर 2022 को बाली में, भारत ने G-20 की एक साल की अध्यक्षता ग्रहण की थी आज भारत अध्यक्ष नहीं है पर फिर भी विश्लेषक भारत की सफल पारी का बखान करते नहीं थकते। बढ़ती प्रमुख शक्ति प्रतिद्वंद्विता और बहुपक्षीय संस्थानों के क्षरण के युग में, भारत ने G-20 में नई जान फूंकी, जिससे यह वैश्विक ध्यान का केंद्र बिंदु बन गया है। इससे पहले कभी भी G-20 को इतना महत्वपूर्ण नहीं माना गया था। यह ऐसे समय में आया है जब कई अन्य बहुपक्षीय मंच घटती प्रासंगिकता से जूझ रहे हैं, जो बदलती वैश्विक व्यवस्था और समकालीन चुनौतियों के अनुकूल इन संस्थानों की विफलता का प्रतिबिंब है।

जहाँ वाशिंगटन पोस्ट ने G-20 समिट मोदी के भारत के लिए एक विशाल सफल वैश्विक ब्रांडिंग अभियान करार दिया वहीँ खलीज टाइम्स ने लिखा,-भारत को G-20 सम्मेलन के नेतृत्व और कई विवादास्पद मुद्दों को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस दोनों से प्रशंसा मिली। एसोसिएटेड प्रेस ने ‘मोदी की कूटनीतिक जीत” में इस बार जोर दिया कि भारत ने G-20 शिखर सम्मेलन में विभाजित विश्व शक्तियों के बीच समझौता किया’।

ब्लूमबर्ग ने अपने लेख ‘और इस साल के G-20 के विजेता हैं…’ में कहा कि G-20 ने भारत के प्रधानमंत्री के विश्व नेता के दर्जे को मजबूत किया है। फाइनेंशियल टाइम्स में ‘G-20 शिखर सम्मेलन में भारत की चमक’ शीर्षक से छपे एक लेख में पत्रकार जॉन रीड के हवाले से कहा गया है, “मुझे लगता है कि यह भारत और व्यक्तिगत रूप से मोदी दोनों के लिए एक निर्विवाद जीत थी।”

स्विस फ्रांसीसी भाषा के दैनिक समाचार पत्र ले टेम्प्स के लेख ‘अफ्रीकी संघ G-20 का स्थायी सदस्य बन गया’ में कहा गया है कि अफ्रीकी संघ का G-20 में प्रवेश मोदी के लिए एक उल्लेखनीय कूटनीतिक जीत है, जिन्होंने पहल की और इस तरह भारतीय नेता की छवि को बहाल किया। 

गल्फ न्यूज़ ने भारत के कुशल नेतृत्व को रेखांकित करते कहा है कि ”भारत के लिए G-20 की अध्यक्षता ने जो रेखांकित किया है, वह बहुपक्षीय कूटनीति में देश की बढ़ती भूमिकाको दर्शाता है और भारत आज एक आवाज के रूप में उभर रही है, जिसे सुना जाना चाहिए।” एक आवाज़ के रूप में जिसे अवश्य सुना जाना चाहिए,”

 प्रधानमंत्री की दृढ़ निश्चय क्षमता और नेतृत्व कौशल की करते हुए प्रसिद्द अखबार पोलिटिको ने कहा कि यह भारत के उज्ज्वल भविष्य का क्षण है। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का उपयोग यह दिखाने के लिए किया है कि वह वैश्विक व्यवस्था में अधिक मुखर भूमिका निभा सकती है। वैश्विक मेहमानों के मेजबान के रूप में भारत का आत्मविश्वास एक गहरे भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है। इस बात में कोई संशय नहीं कि भारत ने अपने नेतृत्व को अत्यंत गंभीरता से लिया है। इस मंच को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और वैश्विक आर्थिक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व के लिए एक एकीकृत आवाज की आधार शिला रखने का यह एक अच्छा अवसर मानता है।

भारत की G-20 की अध्यक्षता उनके इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण बना क्योंकि यह सभी की प्रासंगिकता के लिए सामान्य वैश्विक समाधान ढूंढकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाने में सक्षम हुआ, और ऐसा करने में, हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ या ‘विश्व एक है’ की वास्तविक भावना को प्रकट करने हेतु अपने संकल्प के अनुसार कार्य कर पाने में सफल रहे।

भारत एक ऐसे वैश्विक समुदाय की परिकल्पना करता है जहाँ हम सब पारिवारिक सूत्र में आबद्ध हों। विविधता और अंतर्संबंध से युक्त एक दुनिया में, “वसुधैव कुटुंबकम” का प्राचीन भारतीय दर्शन एक अविनाशी दीपक के रूप में खड़ा है जो वैश्विक एकता और समझ की दिशा में मार्ग प्रकट करता है। “दुनिया एक परिवार है” के रूप में अनुवादित, यह गहन अवधारणा सभी जीवित प्राणियों के साथ एक संबंध की भावना को बढ़ावा देने के महत्व को समझाती है, मानव संबंधों की अंतर्संबंधितता को जोर देती है। अपने नेतृत्व के अभियान में हमने न केवल वसुधैव कुटुंबकम के मन्त्र को मानव सहानुभूति की शक्ति का माध्यम मानकर एक समरस दुनिया को आकार देने का प्रयास किया।

हर किसी का विचार था कि विकासशील दुनिया के भीतर अव्यवस्थित क्षेत्रीय राजनीति की चुनौतियों से निपटने हेतु सक्रिय भारतीय जुड़ाव की आवश्यकता है। सबने महसूस किया भारत की G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया ने वैश्विक नेतृत्व में नई दिल्ली की उल्लेखनीय भूमिका रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नया आकार देने में भी भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित हुई है। 

मुझे याद है कि G-20 की कमान संभालते समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “भारत ऐसे समय में G-20 की कमान संभाल रहा है जब दुनिया एक साथ भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी, बढ़ती खाद्य और ऊर्जा की कीमतों और दीर्घकालिक परिणामों का सामना कर रही है।” दुनिया भर के नेता इस बात से प्रभावित थे कि भारत ने हाल ही में पेश की गई थीम “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” से प्रेरित होकर अपने G-20 एजेंडे में “महिला नेतृत्व वाले विकास” को बहुत प्राथमिकता दी है।

आज भारत को अपने समस्त सहयोगियों के साथ समाधानों की तलाश है जो इस महत्वपूर्ण क्षण की तात्कालिकता के अनुरूप हों। पीएम मोदी राष्ट्रों G-20 की भावना के अनुरूप सभी राष्ट्रों के बीच समावेशी संवाद और सहकारी कार्यों की वकालत करते रहें हैं। भारत का G-20 का शानदार सफर हमारी अध्यक्षता के पश्चात भी सतत जारी है। हमने वसुधैव कुटुंबकम के मूल मंत्र के साथ COP28 में प्रतिभाग किया, यह मानते हुए कि COP28 में चर्चा किए गए मुद्दे दुनिया के हर क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री का एजेंडा सभी के लिए एक स्थायी भविष्य हासिल करने के व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित करना था, जिसमें न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर भी जोर रहा। 

पीएम मोदी ने विश्व नेताओं को आश्वासन दिया कि G-20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत समावेशी, महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई उन्मुख नीतियों की दिशा में काम करेगा। महत्वपूर्ण विषयों और प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि G-20 को ‘शांति और सद्भाव’ का एक मजबूत संदेश दिया जिसके बिना आने वाली पीढ़ियां आर्थिक विकास या तकनीकी नवाचार का लाभ नहीं उठा सकती। 

जैसा कि सर्वविदित है G-20 या 20 का समूह दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर सरकारी मंच है। वर्तमान समय में इस समूह की महत्ता पहले से कही अधिक बढ़ी है। 1999 में ग्रुप ऑफ़ ट्वेंटी (G-20) का गठन किया गया था और शुरुआत में यह वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट को हल करने के लिए फायदेमंद नीतियों की चर्चा का विस्तार करने के लिए वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर की बैठक थी।

एक आर्थिक मण्डली के रूप में, G-20 समूह में अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मैक्सिको, तुर्की, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, जर्मनी, ब्रिटेन, भारत, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, इटली, फ्रांस, रूस शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि G-20 की बढ़ती प्रासंगिकता कही न कही संयुक्त राष्ट्र की असक्रियता का परिणाम है पीएम मोदी ने इस बात को विभिन्न मंचो से कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में सफल नहीं हुआ और उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र अपने जनादेश को बनाए रखने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देश संयुक्त राष्ट्र में सुधार करने में विफल रहे हैं।

शुरू से भारत ने स्पष्ट किया है कि आशा, सद्भाव, शांति और स्थिरता महत्वपूर्ण विचार हैं।दुनिया की सबसे उन्नत और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के G-20 समूह में भारत की अध्यक्षता की ने आने वाले नेतृत्व के लिए एक ढांचा तैयार करने में सफलता पायी है। G-20 दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत को व्यापक ध्रुवीकरण और भू-राजनीतिक कठोरता में वृद्धि होने पर विश्व राय बनाने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा जिससे भारत सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ मानवता के सर्वागीण विकास के लिए काम कर पायेगा ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। भारत खंडित दुनिया में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए अथक प्रयास करेगा और सबको इस दिशा में प्रेरित करता रहेगा।

मुझे लगता है आज की दुनिया के लिए यह प्रासंगिक है कि मौसम परिवर्तन को कैसा कम किया जाए? रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव को रोका जाए, हम कैसे आपस में सौहार्द कायम करेंगे? मूल्याधारित वैश्विक व्यवस्था की स्थापना कैसे होगी? 

अपने संतुलित रुख को बनाए रखते हुए भारत को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू करके इस अत्यंत तनावपूर्ण स्थिति को बेअसर करने की जरूरत है। यह हमारा सौभाग्य है कि भारत के यशवस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज भारत एक पारदर्शी न्यायपूर्ण राजनैतिक आर्थिक व्यवस्था के समर्थन में अपनी आवाज उठाने और एक समृद्ध विश्व निर्माण करने की जिम्मेदारी बखूबी उठा रहा है। 

आज भारत चुनौतियों को अवसरों में बदलने के कारण चर्चा में है। यह हमारा सौभाग्य है कि भारत में इस समय मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है भारत में तेजी से लाये जा रहे सुधार और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत को उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि में आत्मनिर्भर, सशक्त शक्ति शाली और सतत रूप से विकास करता भारत एक महान शक्ति है। हम शिखर तक पहुंचने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहे हैं जिसका लोहा पूरा विश्व मानता है।

आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ती अर्धव्यवस्था, वैश्विक पटल पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता, जनसख्यकीय लाभांश (अगले पच्चीस वर्षों तक भारत युवा भारत रहेगा) जैसे अन्य महत्वपूर्ण कारक हमारा पक्ष अत्यंत मजबूत बनाते हैं। मेरा मानना है कि भारत के G-20 नेतृत्व के बाद की पारी में देश को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने हेतु और उसे अंतरराष्ट्रीय स्वरुप देने हेतु प्रधानमंत्री के प्रयासों को सामूहिक सहयोग देने की आवश्यकता है और हमेशा की तरह इस सामूहिक प्रयास में हमारे युवाओं की सफल भूमिका रहेगी

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रमेश पोखरियाल "निशंक"

लेखक भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।
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