ravibhushan
-
अंतरराष्ट्रीय
भारत की विदेश-नीति और पड़ोसी देश
विदेश नीति सदैव राष्ट्रीय हित में होती है। राष्ट्रीय हित के साथ विदेश नीति का गहरा सम्बन्ध है। इस नीति से देश के हितों की रक्षा के अतिरिक्त अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपने लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयत्न किये…
Read More » -
शख्सियत
मैनेजर पाण्डेय साहित्यवादी आलोचक नहीं हैं
मैनेजर पाण्डेय (23.9.1941- 6.11.2022) को केवल हिन्दी और साहित्य का आलोचक कहना गुनाह है, उन्होंने साहित्य समझने की और आलोचना की एक नयी दृष्टि दी। उन्होंने साहित्य को सदैव मनुष्य की सामाजिक चेतना और सामाजिक चिन्ता की देन माना…
Read More » -
चतुर्दिक
धर्म, राजनीति और संस्कृति
हम सब एक भ्रष्ट और विकृत समय में जीने को अभिशप्त हैं। इस समय का निर्माण जिन शक्तियों ने (मुख्यत: आर्थिक, राजनीतिक एवं धार्मिक) किया है, उन शक्तियों की पहचान सबको है, ऐसा नहीं कहा जा सकता जिन्हें उनकी…
Read More » -
चर्चा में
तुझे खामोश रहना है
यह शीर्षक गुजराती साहित्य परिषद की पाक्षिक पत्रिका ‘निरीक्षक’ के 16 जून 2021 के अंक में प्रकाशित पारुल खख्खर की 14 पंक्तियों की कविता ‘तारे बोलवानुं नहि’ का हिन्दी अनुवाद है। इस कविता का हिन्दी अनुवाद इन पंक्तियों के…
Read More » -
चर्चा में
गुजराती लेखकों के विरोधी स्वरों की गूँज
गुजरात साहित्य अकादमी एक सरकारी संस्था है और गुजराती साहित्य परिषद गुजराती साहित्य के विकास और उन्नति के लिए सही अर्थों में साहित्य परिषद है, जिसकी स्थापना रणजीत राय मेहता (25.10.1881 – 04.06.1917) ने गुजराती समाज के सभी वर्गों के लिए…
Read More » -
चर्चा में
और अब लिटरेरी नक्सल
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और ‘गुजरात साहित्य अकादमी’ के अध्यक्ष विष्णु पाण्ड्या के बीच कुछ अद्भुत समानता है। 45 वर्षीय विवेक अग्निहोत्री मोदी सरकार के कट्टर समर्थक हैं और विष्णु पाण्ड्या को पद्मश्री की उपाधि नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने…
Read More » -
मुद्दा
आन्दोलन के नाम पर अश्लील अराजकता
आहत अकादमिक वातावरण से उपजे सवाल पिछले मार्च महीने में तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में दो बड़ी सुखद-दुखद घटनाएँ हुईं, जिनपर सबका ध्यान है। 18-19 मार्च को रेणु की जन्म शती के अवसर पर दो दिनों की…
Read More » -
चर्चा में
कृषि कानून और किसान आन्दोलन
रामधारी सिंह दिनकर ने 1933 की अपनी एक कविता ‘दिल्ली’ में दिल्ली को ‘कृषक-मेध की रानी’ कहा है। स्वतन्त्र भारत में कृषि प्रश्नों, समस्यायों पर कम ध्यान दिया गया। सरकार किसी भी दल की रही हो, कृषि-सम्बन्धी सभी समस्यायों…
Read More » -
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना संकट: नवउदारवादी नीतियों का ‘प्रोडक्ट’
पिछले महीने अप्रैल के आरम्भ में 91 वर्षीय नोम चोम्स्की (7.12.1928) ने 37 वर्षीय क्रोट्शियाई दार्शनिक, लेखक, राजनीतिक कार्यकर्त्ता और ‘डेमोक्रेसी इन यूरोप मूवमेंट 2025(डीआईईएम25)’ के सहसंस्थापक स्रेको होर्बार्ट (28.2.1983) को अमेरिका के दक्षिण एरिजोना के सबसे बड़े शहर टक्सन…
Read More »








