Gajendra Pathak
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साहित्य
महात्मा गाँधी की भाषा दृष्टि
गाँधी के जीवन में भाषा को लेकर पहली उलझन तब पैदा हुई जब वे चौथी कक्षा में थे। अपनी आत्मकथा में उन्होंने एक संस्मरण के जरिए बताया है कि किस तरह भूमिति जैसा प्रिय विषय अँग्रेजी माध्यम की वजह…
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मुद्दा
स्त्री जो नदी के दर्द को समझती है
नदी दिवस और बेटी दिवस का साथ साथ आना अपने आप में एक बड़ा प्रतीक है। दिवस विशेष उन्हीं को समर्पित होता है जो जीवन में विशेष मायने रखते हैं। साथ ही यह भी ध्यान में रहे कि दिवस…
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शख्सियत
मैनेजर पाण्डेय होने का अर्थ
प्रोफेसर मैनेजर पाण्डेय का नाम पहली बार किरोड़ीमल कॉलेज के अपने मित्र संजय प्रसाद से सुना था। संजय भूगोल का विद्यार्थी था। अभी उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी हैं। वह उनमें था जिसे उसके जिले के नाम से से…
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स्त्रीकाल
स्त्री विमर्श के देशी आधारों की खोज
आज बैंगलोर विश्विद्यालय के इस गौरवशाली मंच पर जब हम स्त्री अस्मिता और विमर्श की वैचारिक पृष्ठभूमि पर आभासी संवाद के लिए एकत्र हुए हैं तब मुझे आपके इसी बैंगलोर की बेटी शकुंतला देवी की याद आ रही है। कल…
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शख्सियत
सुशांत के लिए दो मिनट
गजेन्द्र पाठक क्रिकेट का मुरीद हूँ। हुनर से नहीं उसके बाजार से, उसकी लोकप्रियता से। ठीक से कहें तो उसका ककहरा भी अभी तक ठीक से समझ नहीं पाता, लेकिन गाँव में दूसरों को रेडियो पर कमेंट्री सुनते…
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साहित्य
जिन्दगी भर रहूँ, प्रवासी ही कहेंगे हाय
हिन्दी में हमारी पीढ़ी के आसपास तक शायद ही कोई साहित्य अनुरागी हो जिसके पास नागार्जुन और त्रिलोचन के कुछ न कुछ संस्मरण न हों। हमारे साथ यह एक सुखद संयोग था कि इन दोनों किंवदंतियों से जेएनयू में…
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बिहार
बिहार देखने वाले की आँख में है…
गजेन्द्र पाठक विजय नाम्बिसन की इस किताब को जिन्होंने पढ़ा है उनसे भी और जिन्होंने नहीं पढ़ा है उनसे भी निवेदन है कि इस किताब में वर्णित जगहों और चरित्रों को उसी रूप में देखेंगे जिस तरह फिल्मों की शुरुआत…
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