मैथिली शरण गुप्त
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विशेष
भारत में अँग्रेजी राज के पाँव उखाड़ी थी हिन्दी
कांग्रेस के जन्म से लगभग ग्यारह वर्ष पहले 23 मार्च 1874 की ‛कवि वचन सुधा’ में स्वदेशी के व्यवहार के लिए एक प्रतिज्ञा-पत्र प्रकाशित हुआ था, जिस पर कई लोगों के हस्ताक्षर थे। तब महात्मा गांधी की उम्र लगभग…
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संस्कृति
मित्रता और संस्कृति
मैथिली शरण गुप्त जी ने बहुत ही खूबसूरती से निम्नलिखित पंक्तियों मे मित्रता को परिभाषित किया है: ‘तप्त हृदय को, सरस स्नेह से, जो सहला दे, मित्र वही है। रूखे मन को, सराबोर कर, जो नहला दे, मित्र वही…
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