कट्टरता की
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सामयिक
खण्ड-खण्ड नहीं एक अखंड पाखंड
(कट्टरता के साए में हम) आज के ज़माने में पढ़ना ही सबसे ज्यादा बाधित हुआ है। सोशल मीडिया में नेट सिस्टम में लोग रमें हैं। फिर वस्तुनिष्ठ तरीके से बातें करने से लोग चिढ़ जाया करते हैं। बहुत संजीदा तरीक़े…
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