संतोष बघेल
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May- 2021 -18 Mayसाहित्य
कोरोना काल और प्रेमचंद की ‘शांति’ कहानी की प्रासंगिकता
दुनिया में कई महामारियाँ समय-समय पर दस्तक देती रही है। किन्तु अब तक की सभी महामारियाँ किस्से-कहानियों तक ही सीमित थी। किन्तु पहली बार इन कहानियों अथवा महामारियों को प्रत्यक्ष तौर पर महसूस करने का मौका मिला है। महामारी…
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Sep- 2020 -14 Septemberदिवस
त्रिभाषा सूत्र और हिन्दी
भारतीय सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषा भी विकसित और परिमार्जित होती चली आ रही है। मानव जीवन का एक मूल्यवान धरोहर हमारी भाषा ही है। भाषा की समझ के साथ ही मानव जीवन का विकास सम्भव हो पाया…
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Jul- 2020 -31 Julyशख्सियत
उपन्यास विधा और प्रेमचन्द
हिन्दी साहित्य की जब भी बात होती है, तब सबसे पहले हमारे जहन में जिनकी छवि उभरती है, वे है प्रेमचन्द। हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों के अलावा अन्य साहित्य प्रेमी भी प्रेमचन्द को ही सबसे लोकप्रिय साहित्यकार मानते हैं।…
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9 Julyसामयिक
जिन्दगी और इन्स्टालमेंट कहानी का ‘चौधरी’
वर्तमान समय में अधिकांश मनुष्य भौतिकवादी जीवन जीने का आदी हो चुके हैं। इन भौतिक सुख-सुविधाओं के अभाव में एक कदम भी चलना, ऐसा प्रतीत होने लगा है, जैसे पहाड़ काटकर रास्ता निकालना। आधुनिक जीवन शैली कुछ हद तक…
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May- 2020 -21 Mayसाहित्य
आधुनिक दौर में अंधा युग का अश्वत्थामा
लॉकडाउन के दौरान जब से सरकारी चैनलों पर पौराणिक धारावाहिकों का प्रसारण होने लगा, तब से रामायण और महाभारत पर पुन: विमर्श शुरू हो गया है। दोनों ही कथाओं पर लोगों ने नए सिरे से सोचना प्रारंभ कर दिया…
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2 Mayशख्सियत
बीहड़ में तो बागी होते हैं
इस कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने हमारे जीवन को पहले ही कई परेशानियों में डाल रखा है। इस बीच अधिकांश लोगों का सबसे बड़ा सहारा टीवी ही बना हुआ है। 29 अप्रैल में टीवी पर एक ऐसी बुरी खबर…
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Apr- 2020 -18 Aprilसाहित्य
महामारी के बीच मैला आँचल के डॉ. प्रशान्त
फिल्म और साहित्य को तो सदियों से ही समाज के दर्पण के रूप में पहचान मिली हुई है। फिल्म और साहित्य दोनों समाज से जुड़े विभिन्न पक्षों को निरन्तर दिखाता रहा है। वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें, हर तरफ…
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Mar- 2020 -8 Marchसामयिक
मोहन राकेश की ‘सावित्री’ और समकालीन स्त्री विमर्श
भारतीय समाज की कल्पना स्त्री और पुरूष की स्थापना के साथ ही होता है, जहाँ पितृसत्ता का वर्चस्व प्रारम्भ से अब तक बना रहा है। पुरूषों की पितृसत्तात्मक सोच आज भी कई मामलों में वैसी ही दिखाई पड़ती है…
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Jul- 2018 -30 Julyसाहित्य
प्रेमचंद का साहित्यिक चिन्तन
यों तो प्रेमचंद जैसे कालजयी लेखक को तब तक नहीं भूला जा सकता है जबतक साहित्य से लोगों का नाता रहेगा। लेकिन उनके जन्मदिवस पर उनके साहित्य का स्मरण इसीलिए और भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि प्रेमचंद के…
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