सबलोग

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी
  • Mar- 2019 -
    16 March
    एतिहासिक

    अमृता शेरगिल और नेहरू

    सुधीर विद्यार्थी  मैं ऐसे समय में जवाहरलाल नेहरू को याद कर रहा हूं जब वर्तमान सत्ताधारी दल उन पर अनर्गल प्रहार करते हुए देश की हर समस्या के लिए उन्हें ही जिम्मेवार मान रहा है। यहां मैं नेहरू के पक्ष…

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  • 15 March
    शख्सियत

    धीमे भूकंप की तरह है सुबकना – यादवेन्द्र

     यादवेन्द्र  देहरादून में रहने वाले हिंदी के अनूठे कवि श्री लीलाधर जगूड़ी को 2018 के अखिल भारतीय व्यास सम्मान से विभूषित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें 2013 में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित कविता संकलन “जितने…

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  • 15 March
    सिनेमा

    सिनेमा की नयी स्त्री

      यशश्विनी पाण्डेय   हिंदी सिनेमा या यूँ कहे पूरा भारतीय सिनेमा व समाज ही नायक प्रधान रहा है| वह हमेशा ऐसे नायक को प्रस्तुत करता रहा है जो सबकी बात करे, सबके लिए आदर्श हो व सबके लिए लड़े…

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  • 14 March
    स्त्रीकाल

    महिला संघर्ष  जुदा नहीं

      कामायनी स्वामी रोज़मर्रा की लड़ाई आज जब दुनिया महिला पुरुष के इस बाइनरी से बाहर निकल रही है तब सिर्फ महिलाओं के संघर्ष पर बात करना कुछ बेमानी सा महसूस होता है. पर अगर 21वीं शताब्दी के दूसरे दशक…

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  • 14 March
    देश

    ।। प्रधानमन्त्री, चौकीदार क्यों ?

    दीपक भास्कर    ।। प्रधानमन्त्री, चौकीदार क्यों बन रहे हैं?।। चौकीदार शब्द, अब भारत में प्रधानमन्त्री के लिए उपयोग किया जा रहा है। भारत के प्रधानमन्त्री खुद को चौकीदार बताते हैं, पहरेदार बताते हैं तो वहीं विपक्षी पार्टियां ने “चौकीदार…

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  • 13 March
    एतिहासिक

    दास्तान-ए-दंगल सिंह (39)

      पवन कुमार सिंह                  पुलवामा हमले के बाद आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ उभरे आक्रामक राष्ट्रवाद के माहौल में बार-बार 1971 के युद्ध की स्मृतियाँ ताजा हो जा रही हैं। भारत ने एकजुट…

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  • 13 March
    Uncategorized

    देवदासी प्रथा का कलंक

       प्रमोद मीणा   भारतीय संस्कृति की कथित महानता के नाम पर घनघोर ब्राह्मणवादी ग्रंथ तक से उद्धृत की जाने वाली ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’  जैसी पंक्तियों की उलटबांसी की कलई उस समय खुल जाती है जब हम…

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  • 12 March
    देश

    सांस्कृतिक समता का संघर्ष

      संजीव चन्दन   भारतीय उपमहाद्वीप में स्त्रियों के हक में समाज सुधार के कई चरण हैं और कई रूप- आजादी के पहले 18वीं सदी के उत्तरार्ध से शुरू होकर एक दौर 19 वीं सदी के आख़िरी वर्षों तक का…

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  • 12 March
    पर्यावरण

    प्रदूषण के खिलाफ नई जंग

      विमल भाई   दरअसल दिल्ली में कूड़े के बड़े-बड़े ढेर जगह-जगह बन गए हैं । दिल्ली में रोज हजारों टन कूड़ा निकलता है, जिसका निस्तारण बहुत जरूरी है। इन कचरे के पहाड़ों के खतरे भी बहुत हैं। कहीं-कहीं पर…

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  • 11 March
    धर्म

    मैं अन्धा हूँ साहब, मुझे तो हर शख्स में इंसान दिखता हैं

    तमन्ना फरीदी  आज राजनीति का असल लक्ष्य सत्ता प्राप्त करना है, इसके लिए हर प्रयोग किया जाता है जाति का इस्तेमाल होता और धर्म का। आज हम राजनीति में धर्म विषय पर चर्चा करेंगे और बात करेंगे ‘राजा का धर्म’…

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