ajay tiwari
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प्रासंगिक
तानाशाह और शब्द की शक्ति
तात्कालिक राजनीति हमेशा क्षुद्र होती है लेकिन सौ-पचास साल बाद वही इतिहास बन जाती है और गम्भीर अध्ययन का विषय मानी जाती है! जैसे तात्कालिक घटना नीरस वृत्तान्त होती है लेकिन शताब्दियों बाद उसपर जब विश्वास की परतें लग…
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चर्चा में
शाहीनबाग, जाफराबाद और गाँधी
मैं 1970 में दिल्ली आया। पचास वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है कि केन्द्र की सत्ताधारी सरकार के सीधे नियंत्रण में दिल्ली को हिंसा और तबाही के रास्ते पर ठेला जा रहा है। यह तटस्थ रहने का…
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अंतरराष्ट्रीय
राजनीति से हटकर
हर बात को राजनीति मं घसीटकर देखना आज के वातावरण में आम बात हो गयी है। इसका प्रसार पिछले पाँच साल में हुआ है जबसे यह तर्क दिया जाने लगा है कि ‘क्या पहले ऐसा नहीं होता था क्या?’…
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देश
शिक्षा और ज्ञान
अविजित पाठक ने वाजिब सवाल उठाया है कि मल्टीप्ल च्वॉयस क्वेश्चन की ऑब्जेक्टिव प्रणाली (MCQ प्रणाली) ने ज्ञान के रास्ते को अपूरणीय क्षति पहुँचायी है। सारा ज्ञान एक प्रश्न और चार उत्तर के विकल्प में सिमट गया है। 99%…
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चर्चा में
ज्ञानपीठ और भारतीय भाषा
भारतीय ज्ञानपीठ का सम्मानित पुरस्कार श्री अमिताभ घोष को मिला है। वे अंग्रेज़ी के कथाकार हैं। उन्हें अपने अंग्रेज़ी लेखन के लिए सह पुरस्कार दिया गया है। हमारी बहस अमिताभ घोष की साहित्यिक गुणवत्ता पर नहीं है क्योंकि उसके…
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