शिवपूजन सहाय
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शख्सियत
आदर्शोन्मुख यथार्थवाद से यथार्थोन्मुख आदर्शवाद की ओर प्रवृत प्रेमचंद
उपन्यास लेखन के क्षेत्र में 1905 से 1936 तक के कालखण्ड को यदि हम एक युग मान लें तो यह युग प्रेमचंद युग कहा जाएगा। यद्यपि इसी काल में विशम्भर नाथ ‘कौशिक’ श्रीनाथ सिंह, शिवपूजन सहाय, राधिका रमन प्रसाद…
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हलफ़नामा
एक फिल्मकार का हलफ़नामा : भाग 4
गतांक से आगे… आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की किताब हिन्दी साहित्य का इतिहास रश्मि रेखा से माँगकर पढ़ा तो उसमें बहुत ही संक्षिप्त चर्चा खत्रीजी की मिली, वह भी व्यंग्यपूर्ण लहजे में! विस्तृत कुछ भी नहीं। उनकी…
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