लोकजनश्रुतियाँ
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देश
स्वाधीनता आन्दोलन की लोक जनश्रुतियाँ
लोक मानस जितना सरल होता है उतना ही अपनी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के लिए चतुर भी। लोक अपने समाज में घटने वाली घटनाओं का प्रत्यक्ष द्रष्टा बनकर जब उसकी अभिव्यक्ति अपनी बोली बानी में करता है तो उसकी संप्रेषणीयता…
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