योगेंद्र यादव
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आवरण कथा
लोहिया होते तो राजनीति इतनी क्षुद्र न होती
बीती सदी के अस्सी के दशक में कभी तब की मशहूर पत्रिका ‘रविवार’ ने डॉ. राममनोहर लोहिया पर एक विशेषांक निकाला था। विशेषांक में एक लेख जाने-माने पत्रकार राजकिशोर का भी था। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में…
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चर्चा में
गंगा ने बुलाया तो था लेकिन आपने किया क्या?
“गंगा” नाम सुनते ही मन श्रद्धा से झुक जाता है. गंगा केवल एक नदी नहीं, भारतीय अस्मिता का अभिन्न अंग है. लेकिन पिछले कुछ दशकों से इसकी अविरल, निर्मल धारा अब न केवल बाधित होती जा रही है, इसका जल…
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