बहे बयार फागुनी
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सामयिक
झरे पात, बहे बयार फागुनी
लोक जीवन में हास्य और व्यंग्य की सृष्टि का एक बड़ा आधार आपसी नोकझोंक और हाजिर जवाबी रही है। इसमें से ज्यादातर वाचिक परंपरा या बोलचाल में व्यक्त हुआ है और इसलिए लिखित प्रमाण कम ही मिलते हैं। लोक-जीवन…
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