जे पी आन्दोलन
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पर्यावरण
पर्यावरण विमर्श में नदी और पानी
अब इस सिद्धान्त की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व से इतर प्रकृति पर भोगवादी वर्चस्व की भावना ने मानव समाज को प्रकृति से तो दूर किया ही है, जगत के जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों और…
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एतिहासिक
एक नये आन्दोलन का इन्तजार
18 मार्च का दिन आज भी मुझे अच्छी तरह याद है, जब मैं शास्त्री नगर स्थित अपने फ्लैट की छत पर खड़ा होकर पटना को धू-धू कर जलते देख रहा था। यह मेरे जीवन का अनोखा दृश्य था, एक…
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