कवि श्री विनोद पदरज
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पर्यावरण
पानी की जाति
‘जल बिन जीवन सून’, धरती, आकाश, अग्नि, वायु और जल पंचभूत निर्मित यह मानव शरीर। मिट्टी से बना शरीर अन्त में माटी में ही विलीन हो जाना है। इस पंचतत्व निर्मित वपु के भीतर विराजित अदृश्य निराकार…
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