अर्पण जैन ‘अविचल’
-
साहित्य
हिन्दी आख़िर क्यों? : संवाद की समरूपता में निहित है राष्ट्र की प्रगति
भाषा किसी दो सजीव में संवाद स्थापित करने का माध्यम है। जीव-जन्तु, पशु-पक्षियों और मनुष्य के अस्तित्व से ही संवाद का आरम्भ माना जाता है। प्रत्येक सजीव अपनी प्रजाति से किसी ने किसी भाषा में संवाद करते हैं। कोयल…
Read More » -
देश
कोरोना की लहर बनी राजनैतिक उपसर्ग
देश के हालात ऑक्सीज़न और साँसों के लिए मोहताज हो रहे थे, भय और भयाक्रांत जनता इधर-उधर दौड़ रही थी, किसान पहले से ही सड़कों पर थे, अब मरीज़ और परिजन दवाओं, इंजेक्शन और अस्पताल में उपचार मिलने की प्रतीक्षा करते-करते हाँफ़ चुके…
Read More »
