suresh kumar

  • सामयिकदलित आत्मकथाओं में आजादी

    दलित आत्मकथाओं के आईने में आजादी

       वास्तव में देखा जाए तो साहित्य की निर्मिति हमारी सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सामूहिक अस्मिताओं के रचनात्मक पहलू के साथ मुल्क की गतिविधियों और परिस्थितियों का आख्यान होता है। जब लेखक रचनात्मक परियोजना के अंतर्गत अनुभव और…

    Read More »
Back to top button