साहित्य अकादमी की राजनीति

  • समाज

    साहित्य अकादमी का सवर्णवाद

    आजाद भारत की साहित्य अकादमी का 1955 से 2018 तक का लम्बासफर दागदार रहा है। यह दाग, जातिवादी पक्षधरता का है और भाई भतीजावाद का। यह दाग गिरोहबंदी और अपनों को उपकृत करने का रहा है। इसकी सम्पूर्ण गतिविधियों में…

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