संवेदना
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सामयिक
युद्ध, मनुष्यता और संवेदना का क्षरण
नृशंसताओं की आग से निरन्तर झुलस रहे हैं और मनुष्यता की आर्त पुकार कर रहे हैं। आस्थाएँ और जीवन मूल्य त्राहि-त्राहि कर रहे हैं और सोचते हैं कि मानवता की हिफाजत कैसे करें? “युद्ध रोमांचित करता है / ध्वस्त…
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शोध आलेख
शैलेन्द्र के हिंदी सिनेमाई गीतों का स्त्री-पक्ष
शोध-सार हिंदी सिनेमा की विशिष्ट पहचान हैं उसके गीत। गीतों के बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना बिना नमक के दाल जैसा है। हिंदी भाषी दर्शकों के लिए हिंदी सिनेमा की आस्वादन-प्रक्रिया में इसके गीत वही भूमिका निभाते हैं…
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