रंगकर्मी
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नाटक
नक्सलबाड़ी आन्दोलन और नुक्कड़ नाटक
नुक्कड़ नाटक जो पर्याय है संघर्ष का, व्यवस्था के ख़िलाफ़ उठ खड़े होने का, समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कदाचार, धार्मिक कट्ठरता, साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का… वह अचानक आसमान से टपककर रंगजगत में नहीं आ गया है, न…
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लोकसभा चुनाव
भाजपा जान की दुश्मन है, तो कम्युनिस्ट ईमान की – अनीश अंकुर
बेगूसराय यात्रा: एक संस्मरण (भाग 4) 20 अप्रैल की अर्द्धरात्रि में लौटने के बाद दो तीन दिन पटना में रहना हुआ। माध्यमिक शिक्षक संघ में ‘प्राच्यप्रभा’ के सम्पादक व कवि विजय कुमार सिंह व रंगकर्मी मृत्युंजय से मिलने…
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नाटक
भारंगम का बीसवाँ संस्करण
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के तत्वाधान में भारत रंग महोत्सव का आयोजन 1 फरवरी से 21 फरवरी तक हुआ. इस आयोजन में मंचित नाटकों के चयन से लेकर दर्शकों की कमी, रंगकर्मियों की उदासीनता या उनके प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार जैसे…
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कोलकाता की हिन्दी रंग-मंडलियाँ
अनिल शर्मा उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों में कोलकाता में पारसी रंगमंच की शुरुआत हुई. मूनलाइट, मिनर्वा, कोरेंथियन जैसी व्यावसायिक पारसी कंपनियों द्वारा परोसे नाटक देखने अपार जनता उमड़ती थी. सामाजिक-सरोकारों या सुरुचि-सम्पन्नता…
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