सबलोग
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May- 2019 -13 Mayझारखंड
पाँचवीं अनुसूची का मखौल – वाल्टर कण्डुलना
वाल्टर कण्डुलना भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी बहुल आबादी है, जो प्राचीन रीति-रिवाजों और प्रथाओं की एक सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन को संचालित और सांस्कृतिक संसाधनों का प्रबंधन…
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13 Mayव्यंग्य
सुनिये प्रधानमन्त्री जी – वेद प्रकाश भारद्वाज
वेद प्रकाश भारद्वाज सुनिये प्रधानमन्त्री जी! मैं आपके देश का एक अदना सा नागरिक आपको बड़े दुखी मन से यह पत्र लिख रहा हूँ। जब से चुनाव शुरू हुए मैं आपको पत्र लिखने की सोच रहा था पर…
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12 Mayएतिहासिक
दास्तान-ए-दंगल सिंह (41) – पवन कुमार सिंह
पवन कुमार सिंह आपातकाल की समाप्ति के बाद 1977 का आमचुनाव एक बड़े उत्सव की तरह था। 18 जनवरी 1977 को अचानक इमरजेंसी वापस लेकर और आमचुनाव की घोषणा करके इंदिरा जी ने हर खासोआम को चौंका दिया…
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11 Mayएक पुरातत्त्ववेत्ता की डायरी
माचिस कौन ले गया , अगिया बेताल
शरद कोकास भाग – 18 वाकणकर सर के साथ अवशेषों को संरक्षित करने की प्रक्रिया पूर्ण करते ही हम लोगों के अध्ययन का एक अध्याय पूर्ण हो चुका था सो शाम को हम लोग थोड़ा…
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10 Mayमीडिया
आज के दौर में पत्रकारिता का बदलता स्वरुप – कर्ण सिंह
कर्ण सिंह देश में पत्रकार को समाज का आईना समझा जाता है वहीं मीडिया को लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ भी माना जाता है। जैसाकि हम सब जानते है कि भारत में विविधताओं का समावेश है जिसके कारण पत्रकार…
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10 Mayउद्योग
पावर सेक्टर – चुनौतियाँ व नवीन उपक्रम’ – पल्लवी प्रसाद
पल्लवी प्रसाद भारत सरकार ने देश के निरन्तर औद्योगिक विकास के लिये पावर सेक्टर को आधारभूत क्षेत्र माना है। यह जरूरी है कि हम पारम्परिक ऊर्जा स्रोत जैसे कोयला, पेट्रोलियम, वगैरह पर अपनी निर्भरता कम करें क्योंकि यह स्रोत…
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9 Mayआवरण कथा
लोकतन्त्र और हमारा समय – रामनाथ शिवेन्द्र
रामनाथ शिवेन्द्र आज का हमारा समय समतल, सीधा, एकरेखीय, सरल, व तरल नहीं है भले ही दिखता हो सरल, तरल तथा एक रेखीय। दिखने में लगता हो कि भाई चारे, बन्धुत्व, सहभागिता पूर्ण रिश्तों वाले उदार समाज के…
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8 Mayलोकसभा चुनाव
चुनाव, विकास और पर्यावरण
राजकुमार कुम्भज इस समय देश भीषण गर्मी के दौर से तो गुज़र ही रहा है, सत्रहवीं लोकसभा चुनाव और राजनीति के वातावरण ने भी माहौल तपा रखा है, किन्तु सबसे दुःखद यह है कि देश की जनता के…
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8 Mayस्त्रीकाल
विवाह का अन्तः विस्फोट
निवेदिता मेनन परिवार के इस स्वरूप में हिंसा ऐसी अन्तर्निहित संस्था है जो ‘जेंडर’ के सार तत्व का निर्माण करती है। मैं यहाँ शारीरिक हिंसा की बात विशेष तौर पर नहीं कर रही हूँ। मेरा आशय इस तरह…
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7 Mayबिहार
बिहार में महागठबन्धन का अपराध – व्रजकुमार पाण्डेय
व्रजकुमार पाण्डेय 2014 के लोकसभा में भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने जो वायदे किये थे – उनको लागू करने की दिशा में कुछ नहीं किया। उल्टे नोटबन्दी और जीएसटी लागू कर लोगों को परेशानियों में डाला। दूसरी ओर…
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