शंकर शरण
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Aug- 2026 -2 AugustUncategorized
आइडियोलॉजी की हानियाँ
यह अक्तूबर 1888 की बात है। रूस में युवा चेखव का नये लेखक के रूप में उभरना शुरू ही हुआ था। कोई उन्हें उदारवादी तो कोई दकियानूसी कहते थे। तब वरिष्ठ साहित्यकार अलेक्सेई प्लेशचियेव ने चेखव से पूछा। उत्तर…
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