Read love before making love
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सामयिक
प्रेम करने से पहले प्रेम को पढ़िए भी
सलिल सरोज “कौन सा गुनाह ? कैसा गुनाह ? किसी से जिन्दगी भर स्नेह रखने, प्रेम करने का गुनाह। स्नेह और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचने लगे तो उसका त्याग करने का गुनाह। है ना अजीब बात!…
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